5 मई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पालिका की बेहतरी के लिए आइएएस अधिकारियों को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी

नोडल अधिकारियों के पास विभिन्न निकायों व सरकारी विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी होगी

2 min read
Google source verification
karnataka government

पालिका की बेहतरी के लिए आइएएस अधिकारियों को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी

बेंगलूरु. राज्य ने राजधानी के स्थानीय निकाय के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा के (आइएएस) के अधिकारियों को हर जोन के लिए नोडल अधिकारी के तौर पर तैनात किया है। मुख्य सचिव टी एम विजय भास्कर ने इसके बारे में आदेश जारी कर दिए हैं। इस अस्थायी व्यवस्था के तहत नोडल अधिकारियों के पास विभिन्न निकायों व सरकारी विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी होगी।

हालांकि, इसका भारी विरोध हो रहा है व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और उप मुख्यमंत्री डॉ.जी.परमेश्वर से इसकी शिकायत की गई है। सूत्रों के मुताबिक महादेवपुर को छोड़ कर बाकी सभी जोनों में जिन अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है वे या उसी क्षेत्र में रहते हैं अथवा आसपास के जोन में। आदेश के मुताबिक ये नोडल अधिकारी महीने में कम से कम एक बार क्षेत्र का दौरा करने के साथ ही बैठक भी करेंगे और समस्याओं की जानकारी लेकर उसे सुलझाने की कोशिश करेंगे।

साथ ही बीबीएमपी, बेंगलूरु विकास प्राधिकरण, बेंगलूरु जलापूर्ति एवं मल निकास , बेंगलूरु बिजली आपूर्ति कंपनी (बेसकॉम), लोक निर्माण विभाग , यातायात पुलिस, दूरसंचार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के जोनल अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और इसके बारे में मुख्य सचिव को प्रतिवेदन देंगे।

बताया जाता है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर यह नियुक्तियां हुई हैं। शहर में अभी तक बाढ़, बरसाती नालों पर अवैध कब्जे, बारिश से पेड़ों या बिजली के खम्बे गिरने, खुदाई से सड़़कें खस्ता होने या किसी भी समस्याओं को लेकर कोई भी संस्था जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। सभी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर समस्याओं के निवारण करने के बजाए अपना समय बर्बाद करते हैं।

विजय भास्कर ने बीबीएमपी में प्रशासक के तौर पर डेढ़ साल तक काम किया था। उन्हें बीबीएमपी के अंदरूनी और बाहरी कामों की सही जानकारी है। बीबीएमपी पर शिकंजा कसने के उद्देश से आइएएस अधिकारियों को प्रभारी बनाया गया है। उन्हें संंबंधित क्षेत्र के संयुक्त आयुक्त से भी अधिक अधिकार मिलेंगे।

वे सभी संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करने के अलावा समस्याओं का निवारण करेंगे। बैठकों में लिए जाने वाले फैसलों और उन पर हुए काम की जानकारी हर माह मुख्य सचिव को देंंगे। बीबीएमपी के आयुक्त एन.मंजुनाथ प्रसाद को विभिन्न समस्याएं देखने का समय ही नहीं मिलता है। उन पर काम का दबाव कम करने के लिए भी नई व्यवस्था की गई है।


पहले भी हो चुके हैं प्रयास
इस तरह के प्रयास पिछली कांग्रेस सरकार के समय भी पालिका के कामकाज को सुधारने के लिए ऐसी कोशिश हुई थी लेकिन सफल नहीं हो पाई। जब बेंगलूरु विकास मंत्री के जे जार्ज की पहल पर 4 साल पहले नगर स्तरीय समन्वय समिति बनाई गई थी जिसमें सभी एजेंसियों के प्रमुखों के अलावा पालिका आयुक्त व महापौर को भी शामिल किया गया था। इस बार इसे जोन स्तर पर विकेंद्रिकृत कर दिया गया है। पालिका में विपक्ष के नेता पद्मनाभ रेड्डी ने सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि यह परोक्ष तरीके से शहरी निकाय पर कब्जे की कोशिश है। इस व्यवस्था से शहरी निकाय की उपेक्षा भी की जा रही है।