
श्रमण संघ की सशक्त ढाल थे रूपमुनि
मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिद्धार्थनगर में विराजित श्रुत मुनि के सान्निध्य में वरिष्ठ प्रवर्तक रूपमुनि रजत के देवलोकगमन पर गुणानुवाद दिवस मनाया गया। मुनि ने कहा कि वे समस्त मानव जाति को कर्तव्य बोध दिया। श्रमण संघ के एक सशक्त ढाल थे। वचन सिद्धि में महारथ हासिल थी। अपने भक्तों को कर्तव्य का बोध देते एवं प्रेरणा देते थे।
गोशाला, स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल, धर्मशालाएं एवं स्थानक भवनों को निर्मित करने के लिए प्रेरित किया। वह हम सबके लिए एक उदारहण है। इस अवसर पर संघ के अध्यक्ष सम्पत कोठारी ने कविता द्वारा गुरु का स्मरण किया। युवा अध्यक्ष शशांक कोठारी, भूतपूर्व युवा संघ अध्यक्ष प्रमोद श्रीमाल ने विचार रखे। संचालन मदनलाल पोरवाड़ ने किया। मंगलवार को अक्षरमुनि का दीक्षा दिवस मनाया जाएगा।
जैन समाज के डायमंड थे रूपमुनि
चामराजनगर. गुण्डलपेट स्थानक में विराजित साध्वी साक्षी ज्योति व पूजा ज्योति के सान्निध्य में रूप मुनि की याद में गुणानुवाद सभा आयोजित की गई। साध्वी साक्षी ज्योति ने कहा कि वे जैन समाज के डायमंड थे। जन-जन के माई-बाप थे। गरीब-अनाथों के मसीहा थे। लिशासन के गौरव थे। उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुष पृथ्वी पर कभी-कभी आते हैं। साध्वी पूजा ज्योति ने गुणानुवाद करते हुए कहा कि संत मणियों की माला से एक मणि अलग हो गया। जैन समाज के लिए यह क्षति अपूरणीय है। मंत्री आनंद गन्ना ने भी विचार रखे। महिला मंडल की निशा कोठारी, पूजा नंगावत ने गीतिका प्रस्तुत कर श्रद्धांजलि दी।
करुणा के सागर
चामराजपेट जैन स्थानक में सोमवार को साध्वी वीरकांता आदि ठाणा 4 के सान्निध्य में वरिष्ठ प्रवर्तक रूपमुनि के महाप्रयाण पर गुणानंवाद सभा का आयोजन किया गया। साध्वी हीतिका ने स्तवन के माध्यम से गुरुदेव को श्रद्धासुमन अर्पित किए। साध्वी ने कहा कि वे करूणा के सागर थे। वे सरलता और सहजता की प्रतिमूर्ति थे। बाहर से जितने कठोर प्रतीत होते थे, भीतर से उतने ही संवेदना से सराबोर थे। सभा का संचालन करते हुए महावीरचन्द गुलेच्छा ने उनके जीवन से जुड़े कई संस्मरण सुनाए। उन्होंने कहा कि गुरुदेव सच्चे अर्थों में अहिंसा के पुजारी थे। इस अवसर पर कांतिलाल पगारिया, निर्मल बाफणा, दिलखुश बाफणा ने भी विचार रखे।
Published on:
21 Aug 2018 05:47 pm
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