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सिद्धरामय्या ने किया दोबारा मुख्यमंत्री बनने की चाहत का इजहार

मने अपने पांच साल के शासनकाल में सभी जातियों के लोगों की भलाई की है और हम किसी एक जाति तक सीमित कभी नहीं रहे

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सिद्धरामय्या ने किया दोबारा मुख्यमंत्री बनने की चाहत का इजहार

बेंगलूरु. गठबंधन सरकार की समन्वय समिति के अध्यक्ष का पद संभाल रहे पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने शुक्रवार को दोबारा राज्य का मुख्यमंत्री बनने की चाहत का इजहार किया है। लेकिन उन्होंने इस बात का खुलासा नहीं किया कि वे मौजूदा गठबंधन सरकार का कार्यकाल पूरा होने से पहले या उसके बाद दोबारा मुख्यमंत्री बनना पसंद करेंगे।

हासन जिले के होलेनरसीपुर तालुक के हाड्या ग्राम मे शिव मंदिर का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने कहा कि वे दोबारा राज्य के मुख्यमंत्री के पद पर सत्ता में आएंगे। मैं जब दोबारा मुख्यमंत्री बनूंगा तो सरकारी ठेकों में आरक्षण दूंगा। यदि मैं सब कुछ अभी कह दूंगा तो कुछ लोगों की आंखें लाल हो जाएंगी। पंचायत राज संस्थाओं में आरक्षण को उन्होंने लागू किया था लेकिन दूसरे लोग दावा करते हैं कि ऐसा उन्होंने किया था।

उन्होंने कहा कि राजनीति तालाब के पानी की तरह ठहरा पानी नहीं है। समय का चक्र घूमता रहता है और तब ऊपर बैठे लोग नीचे आ जाते हैं और नीचे बैठे लोग ऊपर की तरफ चले जाते हैं। आज की राजनीति जाति व धन के आधार पर चलती है जो खतरनाक है। सिद्धरामय्या को सीएम नहीं बनने देने ेके लिए मेरे सारे विरोधी एकजुट हो गए हैं। लेकिन हमने अपने पांच साल के शासनकाल में सभी जातियों के लोगों की भलाई की है और हम किसी एक जाति तक सीमित कभी नहीं रहे।

उन्होंने कहा कि भगवान एक ही जगह नहीं होते हैं बल्कि सभी जगह होते हैं। भक्तिपूर्वक आराधना करने वालों को भगवान के दर्शन होते हैं। हम किसी को भी धोखा दे सकते हैं पर भगवान को धोखा नहीं दे सकते। अपनी आत्मा को साक्षी मानकर चलना ही महापूजा के समान होता है। डा, राजकुमार अपने प्रशंसको को ही भगवान मानते थे लेकिन राजनीतिज्ञों के लिए जनता ही भगवान है। जनता यदि समर्थन देती है तो यह वर के समान है वरना घर जाना होता है। लिहाजा आपका आशीवांद मिलना जरूरी है।