24 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पाप आत्मा को दुर्गति की ओर ले जाता है

दोपहर में खुल जा सिम सिम प्रतियोगिता में 200 महिलाओं ने भाग लिया।

less than 1 minute read
Google source verification
jainism

पाप आत्मा को दुर्गति की ओर ले जाता है

बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर में आयोजित धर्मसभा में साध्वी संयमलता ने कहा कि पाप का श्राप आत्मा को दुर्गति की ओर ले जाता है। पाप से आप सुखी नहीं बन सकते।

सुखी बनने के लिए, भूख को शांत करने के लिए, अतृप्त मन को तृत्प करने के लिए, आजीविका चलाने के लिए इंसान पाप कमाता है। भलाई, बुराई में बदल जाए तो यह पाप है।

बाग में आग लगा दी जाए तो वह पाप है। औरों की राह में फूल के स्थान पर शूल बिछाना पाप है। अपने सुख के खातिर आरों को दुख देना पाप है।

साध्वी अमितप्रज्ञा ने कहा कि धन की तीन संभावनाएं हैं बोओ, इस्तेमाल करो या नष्ट कर डालो। यदि धन को सन्मार्ग में लगाया जाए तो वह बोया गया, जीवन निर्वाह में लगाया जाए तो उपयोग में लाया गया और यदि गलत रास्ते पर डाला जाए तो नष्ट हो गया।

इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ, जिसमें श्रावक संघ, त्रिशला मंडल, बहुम मंडल, महावीर पाठशाला के बच्चों ने भाग लिया। दोपहर में खुल जा सिम सिम प्रतियोगिता में 200 महिलाओं ने भाग लिया।