
समाने आएगा कम मतदान का सच
राज्य चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की
पांच जिलों में प्रायोगिक परीक्षण के बाद बेंगलूरु में होगा कार्यान्वयन
बेंगलूरु की मतदाता सूची में करीब 20 लाख दोहरी प्रविष्टियां होने का दावा
बेंगलूरु. चुनाव आयोग की एक पहल से जल्द ही मतदाताओं को एक राज्य से दूसरे राज्य की मतदाता सूची में नाम हस्तांतरण कराने की प्रक्रिया और मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियों को हटाना आसान हो जाएगा। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीइओ) राज्य मतदाता सूची को राष्ट्रीय एकीकृत डेटाबेस में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में हैं।
प्रक्रिया को प्रायोगिक आधार पर दक्षिण कन्नड़, उत्तर कन्नड़, मंड्या, धारवाड़ एवं बल्लारी जिलों में शुरू किया जाएगा। अनुमानत: बेंगलूरु की मतदाता सूची में करीब बीस लाख दोहरी प्रविष्टियां हैं। सीइओ कार्यालय का कहना है कि प्रयोगिक चरण की सफलता के आधार पर इसे बेंगलूरु में क्रियान्वित किया जाएगा। अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी केजी जगदीश ने कहा कि सारांश संशोधन की प्रक्रिया के दौरान हम लगभग छह सप्ताह में प्रयोगिक परीक्षण को पूरा करेंगे। उसके बाद इसे बेंगलूरु सहित राज्य के अन्य जिलों में अपनाने की योजना है।
भारत निर्वाचन आयोग (इसीआइ) ने चार साल पहले एक एकीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस में मतदाताओं के डेटा को एकीकृत करने की परियोजना शुरू की थी। अब तक देश के सभी राज्य चुनाव इकाइयों में मतदाताओं का अपना अपना डेटाबेस है जो संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा प्रबंधित सॉफ्टवेयर के उपयोग से संचालित है। इसके तहत कर्नाटक के मतदाता डेटा को चुनावी रोल प्रबंधन (इआरएम) प्रणाली में संसाधित और संग्रहित किया जाता है लेकिन इसीआइ ने देश भर के मतदाताओं के आंकड़ों को संग्रहित करने के लिए चुनावी पंजीकरण अधिकारी नेट (इआरओ नेट) विकसित किया है और संयोग से कर्नाटक देश का आखिरी राज्य है जो अपने मौजूदा सिस्टम से नए प्लेटफार्म इआरओ नेट में स्थानांतरित होगा।
इआरओ नेट का मकसद मतदाता सूची में मौजूद दोहरी प्रविष्टियों को हटाना है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि फर्जी मतदाताओं का नाम हटाने में यह प्रणाली कितनी सफल रही है। कुछ महीने पूर्व हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलूरु में कम मतदान होने पर नागरिक संगठनों और मतदाता सूची विश्लेषकों ने मतदाता सूची की खराब गुणवत्ता को एक कारण बताया था। सूची में कई मतदाताओं के नाम गायब थे जबकि कुछ के नामों में अजीब गरीब त्रुटियों की शिकायत पाई गई थी। चुनाव में बेंगलूरु में मात्र 51 फीसदी मतदान हुआ था। विश्लेषकों का कहना है कि बेंगलूरु में करीब 20 लाख दोहरी प्रविष्टियां भी हैं जिस कारण मतदान प्रतिशत काफी कम दिखता है जबकि मतदाता पूरे उत्साह से मतदान में भाग लेते हैं। सीइओ कार्यालय का कहना है कि नए साफ्टवेयर की मदद से हम दोहरी प्रविष्टियों को कम करने में सफल हो सकते हैं। इससे स्वभाविक रूप से चुनाव के दौरान बेंगलूरु में मतदान प्रतिशत बढ जाएगा और फर्जी मतदाताओं के नाम समाप्त हो जाएंगे। साथ ही मतदाता ऑनलाइन प्रक्रिया से अपने नाम में और अन्य प्रकार की त्रुटियों में सुधार कर सकते हैं।
Published on:
29 Aug 2018 05:42 pm
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