
इन स्कूलों के विद्यार्थियों को मिलेगा मुफ्त बस पास
बेंगलूरु. विद्यार्थियों को मुफ्त बस पास देने से मना करने के दो दिन बाद मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने इस मसले पर अपना रूख बदल लिया है। मुख्यमंत्री अब कह रहे हैं कि सरकार सिर्फ सरकारी शिक्षण संस्थानों के विद्यािर्थयों को मुफ्त बस पास देने पर विचार कर रही है। निजी शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा।
मंगलवार को इस मसले पर सरकार कोई निर्णय ले सकती है। शनिवार को कुमारस्वामी ने कहा था कि उन्होंने कभी विद्यार्थियों को मुफ्त पास देने का वादा नहीं किया था। कुमारस्वामी ने कहा था कि हर किसी को हर चीज मुफ्त या रियायती दर पर देना संभव नहीं है।
सोमवार को कुमारस्वामी ने अपने चुनाव क्षेत्र रामनगर जिले के चन्नपट्टणा में कई विकास कार्यों की शुरूआत करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकारी स्कूल-कॉलेजों में पढऩे वाले विद्यार्थियों को मुफ्त बस पास देने पर विचार किया जा रहा है। कुमारस्वामी ने कहा कि वे मंगलवार को संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ इस मसले पर बैठक करेंगे। कुमारस्वामी ने कहा कि मुफ्त बस पास योजना को लागू करने में सबसे बड़ी समस्या धन की कमी है।
कुमारस्वामी ने कहा कि निजी स्कूलों में दाखिले के लिए लाखों रुपए डोनेशन देने वाले विद्यार्थियों को मुफ्त बस पास की क्या जरुरत है। उन्होंने भाजपा को इस मसले को राजनीति नहीं करने की चेतावनी देते हुए कहा कि वे उससे बेहतर कर सकते हैं। कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को आगे कर भाजपा इस मामले का राजनीतिकरण कर रही है। कुमारस्वामी ने कहा कि अभी सभी विद्यार्थियों को रियायती बस पास दिया जा रहा है।
कुमारस्वामी ने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर लोगों ने रसोई गैस सब्सिडी छोड़ दी उसी तरह निजी स्कूलों में पढऩे वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को सरकारी बसों के रियायती अथवा मुफ्त बस पास की सुविधा छोड़ देनी चाहिए ताकि जरुरतमंद लोगों को इसका लाभ मिल सके।
गौरतलब है कि शनिवार को विभिन्न विद्यार्थी संगठनों ने मुफ्त बस पास की मांग को लेकर स्कूल-कॉलेज बंद का आह्वान किया था। बेंगलूरु सहित राज्य के अन्य हिस्सों में भी विद्यार्थियों ने प्रदर्शन किए थे। शनिवार को ही कुमारस्वामी ने कहा था कि धन की कमी के कारण सभी विद्यार्थियों के लिए मुफ्त बस पास योजना लागू नहीं की जा सकती है।
हालांकि, परिवहन और शिक्षा मंत्री कह चुके हैं कि उनका विभाग इस योजना का 25-25 फीसदी हिस्सा वहन करेगा। परिवहन मंत्री डी सी तमण्णा ने भी पहले इसका विरोध किया था लेकिन विद्यार्थी संगठनों के आंदोलन तेज करने के बाद उन्होंने शिक्षा विभाग से मदद मिलने पर इसे लागू करने की बात कही थी।
मीडिया पर बरसे
कुमारस्वामी ने एक बार फिर मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि वह हर छोटी चीज को बड़ा बनाकर पेश कर रही है। टीवी चैनलों की आलोचना करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि हमेशा सरकार के खिलाफ चीजें दिखाना सही नहीं है।
विभाजन की मांग अनुचित
कुमारस्वामी ने अलग उत्तर कर्नाटक की मांग को अनुचित करार देते हुए कहा कि ऐसी मांग करने वाले लोग वहीं जो राज्य को चला पाने में समक्ष नहीं रहे। कुमारस्वामी ने उत्तर कर्नाटक की उपेक्षा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बजट व्यय का 65 फीसदी हिस्सा उत्तरी जिलों को आवंटित किया गया है।
मतदान के समय मेरे बारे में क्यों नहीं सोचा
उत्तर कर्नाटक के मतदाताओं पर निशाना साधते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि इस क्षेत्र के मतदाता अब सरकार से ऋण माफी चाहते हैं लेकिन जब वे मतदान करने गए थे तब मेरे बारे में क्यों नहीं सोचा? कुमारस्वामी ने कहा कि जाति और धर्म के नाम पर मतदान करने वाले लोगों को मुझसे सवाल पूछने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
Published on:
24 Jul 2018 04:22 pm
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