
धर्मसभा: रमणीक मुनि ने कहा कि जुबान आग भी है और पानी भी
बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्त्वावधान में गोड़वाड़ भवन में मंगलवार को उपाध्याय रविंद्र मुनि के सान्निध्य में रमणीक मुनि ने कहा कि वचन ही दूरी बढ़ाते हैं और वचन से ही क्रोध शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा कि यदि आपने किसी के मान-सम्मान के खिलाफ टिप्पणी कर दी तो वह आपसे मिलना और आपका चेहरा देखना भी पसंद नहीं करता। वचन से ही अपने पराए हो जाते हैं। वचन से ही लोग करीब आ जाते हैं।
मुनि ने कहा कि नेता माइक पर भाषण दे लोगों में आग लगा देते हैं और खुद बुलेटप्रूफ कार में बैठकर चले जाते हैं। यह जुबान आग का काम करती है और पानी का भी काम करती है। कुछ वचनों से आदमी क्रोध में आ जाता है। वचन से ही आदमी प्यारा लगता है। वचन से ही मोक्ष मिल जाता है।
उन्होंने कहा कि ढाई साल की उम्र में बच्चा बोलना सीख लेता है, लेकिन कैसे बोलना है वह जिंदगी भर नहीं सीख पाता है।
इसमें उसकी जिंदगी गुजर जाती है। भगवान महावीर ने कहा है कि कोई बात सत्य हो, किसी को चुभती है तो वह सत्य नहीं कहना चाहिए। भगवान महावीर ने कहा है कि चोर को भी चोर मत बोलो। ऐसा भी सत्य नहीं बोलो कि जो किसी को चुभ जाए। यह तीन इंच की जुबान 6 फीट आदमी को मरवा देती है। कब, क्या जवाब देना है यह भी कला है। शब्दों से घर भी अखाड़ा बन जाता है।
मुनि ने कहा कि बोली से ही महाभारत हुआ और लाखों लोग मारे गए। घरों का वातावरण खराब हो रहा है तो उसमें परिवार के सदस्य जिम्मेदार हंै। उनकी वाणी में मिठास होनी चाहिए। रमणीक मुनि ने 'जो गम किसी को हमने दिया वो गम तो हमको लेने ही पड़ेंगे...Ó और 'तोलकर बोलो सदा, दोनों के बीच खींचती यह दीवार है..Ó गीत का संगान किया।
उपाध्याय रविंद्र मुनि ने ऋषभ मुनि के मासखमण के तहत 27वें उपवास तपस्या की अनुमोदना की। समाज में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए चिकपेट शाखा संघ के महामंत्री गौतमचंद धारीवाल इन्दिरा धारीवाल का जैन दुपट्टा ओढ़ाकर अभिनंदन किया। इन्द्रचंद बिलाडिय़ा ने बताया कि सभा में उपनगरों सहित चंडीगढ़ एवं महाराष्ट्र से आए श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया।
Published on:
08 Aug 2018 05:39 pm
