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एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर एचडी कुमारस्वामी के भाई और उपमुख्यमंत्री के बीच खींचतान

रेवण्णा का दावा है कि बीडीए इतनी बड़ी जिम्मेदारी निर्वहन करने में सक्षम नहीं है, इसलिए यह पीडब्लूडी को सौंपा जाए

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एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर एचडी कुमारस्वामी के भाई और उपमुख्यमंत्री के बीच खींचतान

दोनों मंत्री अपने अपने विभाग को दिलाना चाहते हैं योजना

बेेंंगलूरु. एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को लेकर जारी जन विरोध के बीच सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों में खींचतान शुरू हो गई है। उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर और लोक निर्माण मंत्री (पीडब्लूडी) एच.डी. रेवण्णा के बीच इस बात को लेकर जद्दोजहद है कि परियोजना की जिम्मेदारी किसे सौंपनी है।

परमेश्वर का मानना है कि 15,825 करोड़ रुपए की इस परियोजना की जिम्मेदारी बेंगलूरु विकास प्राधिकरण (बीडीए) को मिलनी चाहिए, जबकि रेवण्णा का दावा है कि बीडीए इतनी बड़ी जिम्मेदारी निर्वहन करने में सक्षम नहीं है, इसलिए यह पीडब्लूडी को सौंपा जाए।

सूत्रों के अनुसार परमेश्वर ने इस संबंधी बैठक में मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के सामने ही इशारा किया कि रेवण्णा को अन्य विभागों के कार्यों में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है।

परमेश्वर ने रेवण्णा द्वारा ऊर्जा विभाग के अभियंताओं के तबादले पर भी आपत्ति जताई और कहा कि संबंधी विभाग के मंत्री से चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे बेंगलूरु विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी उनके पास है, इसलिए रेवण्णा को बीच में आने की जरूरत नहीं है। वे इस परियोजना को आरंभ कर बीडीए का कद बढ़ाना चाहते हैं। बीडीए ने इससे पहले बेंगलूरु में ग्रेड सेपरेटर, फ्लाईओवर और अंडर पास निर्मित किए हैं।

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शिरूर मठ प्रमुख की पीएम रिपोर्ट मिली
बेंगलूरु. गृह मंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने कहा कि शिरूर मठ प्रमुख के मृत्यु प्रकरण में पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को मिल गई है लेकिन अधिक जानकारी के लिए फोरेंसिक रिपोर्ट मिलने की प्रतीक्षा है।

उन्होंने कहा कि बेंगलूरु में प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को छोड़ा नहीं गया है। परियोजना की व्यवहार्यता पर विचार किया गया है। इसके स्वरूप, खर्च तथा पर्यावरण पर असर का अध्ययन किया जाएगा और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर परियोजना को लागू करने पर निर्णय किया जाएगा।