
‘महावीर’ नाम ही अहिंसा के शाश्वत सिद्धांतों की याद दिलाता है।
जैन समुदाय Jain community में उदारता और दान की भावना अत्यंत गहरी है। आर्थिक रूप से संपन्न होने के साथ-साथ यह समुदाय जरूरतमंदों की सहायता के लिए हमेशा आगे रहता है और शिक्षा, स्वास्थ्य व सामाजिक कार्यों में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। हमें स्वीकार करना होगा कि जैन समुदाय ने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ये विचार मणिपाल अस्पताल Manipal Hospital के अध्यक्ष डॉ. एच. सुदर्शन बल्लाल ने भगवान महावीर जैन अस्पताल Bhagwan Mahaveer Jain Hospital के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ‘महावीर’ नाम ही अहिंसा के शाश्वत सिद्धांतों की याद दिलाता है। अपरिग्रह (गैर-स्वामित्व), करुणा और मानवता की सेवा जैन धर्म के मूल मूल्य हैं। सभी जीवों के प्रति दया और अहिंसा का सिद्धांत जरूरतमंदों के प्रति करुणा को स्वाभाविक बनाता है, जिससे समुदाय में उदारता और दान की सशक्त संस्कृति विकसित हुई है।
डॉ. बल्लाल Dr. H. Sudarshan Ballal ने कहा कि ट्रस्ट का 50 वर्षों का सफर केवल उपलब्धियों का पैमाना नहीं है, बल्कि निरंतरता और ईमानदारी का भी साक्ष्य है। लालच और ईर्ष्या के इस कलयुग में, जहां सफलता को अक्सर संख्या और लाभ से मापा जाता है, वहां ट्रस्ट का कार्य आशा की किरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर खड़ा है। उन्होंने कहा कि स्वर्ण जयंती का यह अवसर आत्ममंथन और नवीनीकरण का भी क्षण है। आज पर्यावरणीय चिंताएं, असमानता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच तथा मजबूत नैतिक मूल्यों का अभाव जैसी चुनौतियां हमारे सामने हैं, जिनका समाधान सेवा और करुणा के मूल सिद्धांतों से ही संभव है।
भगवान महावीर मेमोरियल जैन ट्रस्ट Bhagwan Mahavir Memorial Jain Trust के सचिव पारस भंडारी ने कहा, अस्पताल की स्थापना वर्ष 1975 में ऐसे समय हुई, जब संसाधन अत्यंत सीमित थे और चुनौतियां असंख्य थीं। बावजूद इसके, सेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने इस संस्था को मजबूती दी और यही संकल्प आगे चलकर इसकी मजबूत नींव बना। इसी निरंतर सेवा भाव के कारण संस्था की 50वीं स्वर्ण जयंती को ‘कल्पवृक्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है, जो सामूहिक प्रयास, विश्वास और निस्वार्थ सेवा का सजीव प्रतीक है। पांच दशकों की यात्रा में परिस्थितियां बदलीं, लेकिन सेवा का उद्देश्य कभी नहीं बदला। यह यात्रा किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि ट्रस्टियों की दूरदृष्टि, चिकित्सकों की संवेदनशीलता, कर्मचारियों के समर्पण, दानदाताओं की निस्वार्थ भावना और समुदाय के विश्वास से लिखी गई सामूहिक कहानी है, जो आने वाले वर्षों के लिए भी प्रेरणा बनी रहेगी।
ट्रस्ट के अध्यक्ष मोहनलाल रांका ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि एक छोटा-सा बीज 50 वर्षों में विशाल कल्पवृक्ष बन गया है। भगवान महावीर जैन अस्पताल पीडि़तों को न केवल उपचार प्रदान करता है, बल्कि उन्हें आशा और सम्मान भी देता है।
उन्होंने कहा कि यह अस्पताल आज मानव सेवा का मंदिर बन चुका है और नैतिकता, सहयोग तथा विश्वास के साथ निरंतर सेवा करता आ रहा है। मानव सेवा ही ट्रस्ट का मूल उद्देश्य है और इसी भावना के साथ यह संस्था आगे बढ़ रही है। ट्रस्टिगणों के दूरदर्शी नेतृत्व और सामूहिक प्रयासों के बिना यह सफलता संभव नहीं थी। सेवा का आनंद ही कुछ और है और यही भावना इस संस्था की सबसे बड़ी शक्ति है।इस अवसर पर ट्रस्टी डायरेक्टरी और कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया। लोगों ने संगीतमय शाम 'जीना इसी का नाम है' का लुत्फ उठाया।
भाजपा के राज्य सभा सदस्य लहर सिंह सिरोया, राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड, भारत सरकार के अध्यक्ष सुनील सिंघी कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष मनोहरलाल भंडारी, प्रकाशचंद सिंघवी, रमेश बोहरा, कोषाध्यक्ष जी. विमल भंडारी, संयुक्त सचिव अशोक जैन रांका, संजय एच. सिसोदिया, रमेश यू. बगरेचा, संयुक्त कोषाध्यक्ष चंपालाल मल्लेचा, माइक्रो लैब्स के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक दिलीप सुराणा, ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष किशनलाल कोठारी और फूलचंद जैन सहित समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
Published on:
06 Jan 2026 08:00 pm
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