
भगवान बाहुबली का विशेष मस्तकाभिषेक
श्रवणबेलगोला. कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में भगवान बाहुबली का प्रत्येक रविवार को होने वाले विशेष मस्तकाभिषेक में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान इंद्र देवता ने भी रिमझिम फुहारों के साथ अभिषेक किया। आसमान चारों ओर बादलों से छाया हुआ था। सुंदर वातावरण में भगवान बाहुबली स्वामी का दूध, केसर, चंदन, गन्ने के रस, नारियल पानी, कल्किचूर्ण कर सुगन्धित पुष्पों से पुष्पवृष्टि की गई। इस मौके पर बड़ी संख्या में भक्त श्रद्धालु शामिल हुए। चारुकीर्ति भट्टारक ने कहा कि भगवान बाहुबली के मस्तकाभिषेक को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाने में मीडिया का बहुत बड़ा योगदान रहा है।
जो जागृत हैं वही ज्ञानी हैं
बेंगलूरु. सुशील धाम तीर्थ में उपधान तप पूर्ण करने के बाद आचार्य मुक्तिसागर सूरी वासुपूज्य स्वामी जैन संघ माधवनगर पहुंचे। उन्होंने कहा कि जागे हुए सभी ज्ञानी हैं और सोऐ हुए सभी अज्ञानी हैं। सवाल यह भी सामने आएगा कि सोया हुआ कौन और जागा हुआ कौन है? ज्ञानी और अज्ञानी की अर्थपूर्ण व्याख्या करते हुए आचार्य ने कहा कि आखों का खुला रहना ही जागना एवं बंद होना ही सोना नहीं है। ज्ञानी तो सोते हुए भी जागे हुए होते हंै और अज्ञानी जन जागते हुए भी सोऐ ही कहलाते हैं। आचार्य गुरुवार तक यहीं प्रवचन देंगे।
धन से अधिक महत्त्वपूर्ण धर्म
बेंगलूरु. जयनगर स्थित जैन स्थानक में संत जयधुरन्धर मुनि ने धर्मसभा में कहा कि मनुष्य का जीवन धन और धर्म इन दोनों पटरियों पर चलता है। जीवन में दोनों का होना जरूरी है, लेकिन महत्व धन से भी ज्यादा धर्म का है। उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा कि धर्म जीव का उत्थान करता है, जबकि धन की आसक्ति पतन एवं दुर्गति का कारण है। धन कमाने पाप करना पड़ता है, जबकि धर्म से पाप का नाश हो जाता है। धन की रक्षा करनी पड़ती है, जबकि धर्म हमारी रक्षा करता है। धन भय को उत्पन्न करता है, धर्म भय को समाप्त कर देता है।
Published on:
11 Jun 2018 05:28 pm
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