
राज्यपाल थावरचंद गहलोत Thawar Chand Gehlot ने कहा कि आधुनिक ज्ञान के साथ मजबूत मूल्यों को समाहित करने वाली शिक्षा प्रणाली राष्ट्रीय एकता, सद्भाव और सांस्कृतिक अखंडता को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
मैसूरु विश्वविद्यालय Mysuru University के 106वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत ने सदैव सार्वभौमिक बंधुत्व, शांति, समानता और सौहार्द का संदेश दिया है। मूल्य आधारित शिक्षा, आधुनिक ज्ञान के साथ मिलकर, धर्म और संस्कृति की रक्षा करेगी, राष्ट्रीय एकता और अखंडता को सुदृढ़ करेगी, सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देगी और मानवता के कल्याण के लिए विश्व को सकारात्मक दिशा प्रदान करेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राज्यपाल ने कहा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल अर्थव्यवस्था और जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहे तीव्र वैश्विक परिवर्तनों के दौर में कौशल, विवेक और नैतिक दृष्टिकोण की आवश्यकता बढ़ गई है।
भारत की प्राचीन बौद्धिक परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वैदिक काल से लेकर आधुनिक युग तक भारत ने खगोल विज्ञान, भूविज्ञान, गणित, चिकित्सा सहित अनेक क्षेत्रों में अतुलनीय योगदान दिया है।
दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय ने धर्म, संस्कृति, समाज और सार्वजनिक सेवा में योगदान के लिए एस.वी. राजेंद्र सिंह बाबू, डॉ. टी. शाम भट और श्री पी. जयचंद्र राजू को मानद उपाधियां प्रदान कीं।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री एम.सी. सुधाकर, पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ, कुलपति प्रो. एन.के. लोकनाथ सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
Published on:
06 Jan 2026 06:59 pm
बड़ी खबरें
View Allबैंगलोर
कर्नाटक
ट्रेंडिंग
