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हिमालय में आधी आबादी की आहट

प्रदेश की 27 महिला पर्वतारोहियों ने माउंट बरादासर पर फहराया तिरंगा

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हिमालय में आधी आबादी की आहट

13 वर्षीय रिया ने छह चोटियों पर चढऩे का रेकॉर्ड बनाया
मैसूरु. कनार्टक की पर्वतारोही महिलाओं के दल ने माउंट बरादासर पास की चोटी पर तिरंगा फहराकर अभियान को सफल बनाया। जोश से लबरेज महिलाओं का दल करीब दो घंटे तक इस चोटी पर रहा।
पर्वतारोहण और ट्रेकिंग का यह आयोजन माउंटेन गोएट के सहयोग से टाइगर एडवेंचर फाउंडेशन की ओर से किया गया। इस अभियान में कर्नाटक की 27 महिलाएं शामिल हुईं। अभियान की खास बात यह रही कि मैसूरु शहर की 13 वर्षीय रिया सोलंकी पिछले पांच वर्ष से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में छह चोटियों, दर्रों पर ट्रेक रिकॉर्ड बना चुकी है। गत वर्ष नेपाल स्थित एवरेस्ट बेस कैंप जिसकी ऊंचाई 17590 फीट है पर चढ़ाई करने वाले साहसिक अभियान का हिस्सा बनी थीं।
अभियान में शामिल महिलाएं मैसूर से 17 अपे्रल को दिल्ली के लिए रवाना हुईं। 20 अप्रेल को देहरादून शिविर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। दल बरादासर पास के लिए संकर, खस्ला, सरल, ढलढल, देवबासा और भसा होते हुए आगे बढ़ा।
सामाजिक कार्यकर्ता एमएस अनिता अरुणाक्षी के अनुसार मैसूरु शहर में कभी-कभी आंधी देखी है, लेकिन ढल-ढल रिज शिविर में पहली बार गडगड़़ाहट के साथ बर्फबारी व आंधी का अनुभव किया। इससे कुछ ही क्षणों में शिविर व्हाइट हाउस में तब्दील हो गया।
भारतीय वायु सेना की अन्नाय बालासुब्रमण्य की मानें तो एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे द्वारा माउंट एवरेस्ट पर पहली चढ़ाई की 65 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष में माउंट बरादासर पास पर पर्वतारोहण का आयोजन हुआ। इस अभियान में शिवमोग्गा, चिकबल्लापुर, मडिकेरी, बेंगलूरु, हासन और मैसूरु की महिलाओं ने हिस्सा लिया।

ऐसा रहा अनुभव
डॉ. प्रतिभा गारला कहती हैं कि बर्फबारी व आंधी के चलते जब हम देवबासा शिविर में पहुंचे तो अचानक हमारे सभी तंबू गिर गए और हमें खाने वाले तम्बू में भेजा गया। यहां ट्रेकर्स ने भारी बर्फ गिरने का अनुभव किया।
शिविर के बाहर चार फीट तक बर्फ की परत बिछ चुकी थी। मैसूरु की डॉ. रानी त्रिशूली बताती हैं कि एमटी बरादासर पास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद 70 डिग्री के कोण वाले बर्फीले पहाड़ों पर रुकना अपने आप में रोमांच से भरा था। इस दौरान केदारकांत और रुपिन जैसी चोटियों और घाटियों को देखा। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कलावती ने कहा कि उन्होंने कुद्रमुख और कनूर कोटे में ट्रेकिंग किया। ग्लेशियर पहाड़ों पर ट्रेकिंग करने का एक अलग अनुभव था। इस दौरान पूरे शरीर और रीढ़ की हड्डी में भी कंपकंपी छूटने लगी।

पहले लिया प्रशिक्षण

महिलाओं के दल को 24 फरवरी से 14 अप्रेल तक कुकरहल्ली झील, चामुंडी हिल्स, कुंति हिल्स, होसाहल्ली और गंगोत्री में अनिल कुमार ए, विनय सिंह, अंजली, नव्या रमेश और टाइगर सोलंकी ने प्रशिक्षण दिया गया था। इससे पूर्व डॉ. भारती कोंडजजी रामचंद्र ने महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच की। अभियान की तैयारी के लिए 'जोश रनÓ का आयोजन किया था। पुलिस महानिरीक्षक विपुल कुमार और निदेशक, कर्नाटक पुलिस अकादमी और वन हचयाह, वन के उप संरक्षक (सतर्कता) ने हरी झंडी दिखाई थी।
अभियान को मैसूर के टीएएफ के डीएसडी सोलंकी ने निर्देशित किया। इनमें प्रकृतिवादी मोहन कुमार एम, अध्यक्ष टाइगर एडवेंचर फाउंडेशन कान्हा टाइगर रिजर्व (मध्य प्रदेश), सुजीत, वैभव और अनिल कुमार के शामिल थे।