
अपने निजी जीवन में कभी चिंता नहीं करनी चाहिए
चित्रदुर्गा. शांतिनाथ जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ के तत्त्वावधान में आचार्य कीर्तिप्रभ सूरीश्वर की निश्रा में मुनि संयमप्रभ विजय ने कहा कि जीवन में जो भी घटना घटती है वह अच्छे के लिए होती है। ऐसा समझते हुए अपने निजी जीवन में कभी चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि चिंता करने से जो काम बिगड़ा है या जो काम में नुकसान हुआ है वह काम चिंता करने से अच्छा होने वाला नहीं है।
किंतु चिंता का परित्याग करने से वह काम सुधर सकता है। चिंता से चतुराई कम होती है। उन्होंने कहा कि चिंता करने से दुर्भाग्य उदय में आता है और सद्भाग्य व पुण्य कम होता है। चिंता से अनेक प्रकार का नुकसान होता है। कभी जीवन में चिंता करते हुए किसी को फायदा नहीं हुआ है। सभी को सिर्फ नुकसान ही होता है।
दूसरों का पैसा हजम करने वाले को सुख नहीं
बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रवक संघ चामराजपेट में साध्वी अर्पिता ने कहा कि व्यक्ति कुछ सुख पाने के लिए दूसरे का पैसा हजम करता है तो वह कभी भी सुख नहीं पाता। उसका उसका भुगतान करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि देवकी ने भी हार चुराया था। उनको भी अपने बच्चे खोने पड़े थे। चोर जब चोरी करता है तो जात-पात कुछ नहीं देखता। उसको तो चोरी से मतलब होता है।
साध्वी हीतिका ने कहा कि प्रभु नाम के साबुन से अपने मन के मैल को धोना है। साध्वी वीना ने कहा कि मनुष्य चाहे नीच कुल में जन्म क्यों न ले परंतु उसके गुण श्रेष्ठ होने चाहिए। यदि व्यक्ति के गुण श्रेष्ठ हंै तो हर जगह पर वह अपनी ख्याति पा सकता है। उसका जीवन भी सुधर जाता है। साध्वी वीरकांता ने सभी को आशीर्वाद दे मंगलपाठ सुनाया। संचालन महावीर चंद गुलेच्छा ने किया। सभा में एकासन तप का अनुष्ठान करवाया गया।

Published on:
04 Aug 2018 06:45 pm
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