Video: 10 माह के बच्चे को गर्म सुई से तीन जगह दागा, बीच बाजार भोपे ने जलाई आग और लगा दिए डाम

kamlesh sharma

Publish: Jun, 14 2018 09:19:29 PM (IST) | Updated: Jun, 14 2018 11:08:55 PM (IST)

Banswara, Rajasthan, India

सरकार और प्रशासन भले ही कितने दंभ भर लें। लेकिन बांसवाड़ा में अंधविश्वास के नाम पर बच्चों के जीवन से खिलवाड़ा बंद होने को नाम नहीं ले रहा है।

बांसवाड़ा। सरकार और प्रशासन भले ही कितने दंभ भर लें। लेकिन बांसवाड़ा में अंधविश्वास के नाम पर बच्चों के जीवन से खिलवाड़ा बंद होने को नाम नहीं ले रहा है। ऐसा ही ताजा मामला आया बांसवाड़ा जिले के घोड़ी तेजपुर क्षेत्र में। जहां एक भोपे ने 10 माह के बच्चे को बीच बाजार आग जलाकर डाम लगाए और उसके शरीर पर गर्दन, पैर और माथे पर डाम दिया। लेकिन तबीयत में सुधार न होने पर परिजने उसे घोड़ी तेजपुर आर्दश पीएचसी ले गए। जहां से बच्चे को महात्मा गांधी अस्पताल के लिए रैफर कर दिया।

यह है मामला
घोड़ी तेजपुर क्षेत्र के खरवाड़ा गांव के नंदलाल पुत्र देवला का 10 माह का पुत्र गत 10 दिनों से गंभीर रूप से बीमार है। उसके इलाज के लिए उसके परिजन आसपास गांवों पीपलखूंट में नीम हकीमों के पास उपचार कराते रहे। लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। तबीयत और भी बिगडऩे पर गुरुवार को उसके पिता बच्चे को घोड़ी तेजपुर स्थित नीम हकीम के पास ले गए। लेकिन बच्चे की बिगड़ी तबीयत को देखते हुए नीम हकीम ने बांसवाड़ा ले जाने की बात कही। दुकान से बाहर निकलने पर बच्चे के माता-पिता को एक भोपे ने उपचार देने की बात कही।

बीच बाजार चला डाम का खेल
भोपे के द्वारा उपचार देने का आश्वासन पर उसके परिजन मान गए। जिसके बाद भोपे से वहीं बाजार में कचरा आदि से आग जलाई और सूई मांगवाकर उसे गर्म किया। सूई के अच्छी तरह गर्म होने के बाद गर्म होकर लाल हो चुकी सुई को बच्चे के पैर पर लगा दी। जिससे बच्चा तेजी से चीख पड़ा। उसके बाद भोपे ने फिर सुई को गर्म किया और बच्चे के गर्दन के पिछले हिस्से पर सुई से दाग दिया। दो जगह दागने के बाद भी भोपा रुका नहीं, बल्कि तीसरी बार फिर सुई को गर्म किया और सुई के तेज गर्म हो जाने के बाद उसके माथे पर डाम लगा दिया। जिससे बच्चे के माथे, गर्दन और पैर पर निशान पड़ गए।

किसी ने नहीं रोका
जिले में लोगों पर अंधविश्वास इस कदर हावी है कि बच्चे का डाम देने का खेल बीच बाजार तकरीबन एक घंटे तक चलता रहा। लेकिन किसी ने बच्चे के माता-पिता या भोपे को रोकने की कोशिश नहीं की।

डाम लगने के बाद भी जब बच्चे की तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो परिजन उसे आर्दश पीएचसी लेकर पहुंचे। जहां से उसे महात्मा गांधी अस्पताल के लिए रैफर कर दिया गया।

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