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विनोद नायक
यह नजारा कोई दुनिया के मशहूर फुटबॉल स्टेडियम कैंप नोउ, मैड्रिड का सैंटियागो बर्नब्यू या लंदन का वेम्बली स्टेडियम नहीं है, न ही यहां कोई जर्मनी, अर्जेंटीना, फ्रांस या इटली जैसी टीमें खेल रही हैं।
यह बांसवाड़ा जिले के घाटोल कस्बे में मौजूद मीणा समाज के खेल मैदान का नजारा है, जहां 32वीं संभाग स्तरीय जनजाति खेलकूद प्रतियोगिता के मैच देखने तकरीबन 20 हजार से ज्यादा दर्शक आ रहे हैं। खासकर फुटबॉल का जादू उनके सर चढ़कर बोल रहा है।
मैदान पर दौड़ते, गेंद को पैरों से लुढ़काते खिलाड़ियों में ही ये दर्शक अपना मेसी, रोनाल्डो, नेमार और एम्बाप्पे देख-ढूंढ रहे हैं। बांसवाड़ा में मीणा समाज सुधार संस्थान के इस टूर्नामेंट में वालीबॉल, तीरंदाजी के मुकाबले भी हो रहे, मगर फुटबॉल की दीवानगी अलग ही स्तर पर है।
करीब 50-60 किमी का सफर तय कर यहां आ रहे। मैदान के चारों ओर कई कतारों में बैठकर मैच का लुत्फ ले रहे हैं। इनमें आदिवासी महिलाएं और बुजुर्गों की तादाद भी अच्छी-खासी है।
Published on:
31 Dec 2024 11:10 am
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