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Ashok Gehlot : बांसवाड़ा में 4 प्रसूताओं की मौत पर उठे 4 सवाल? अशोक गहलोत ने कहा- बढ़ती संख्या बेहद डरावनी

Rajasthan : राजस्थान के कोटा, जोधपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा के बाद अब बांसवाड़ा में 4 दिन में 4 प्रसूताओं की मौत का मामला आया है। अशोक गहलोत ने कहा प्रदेश में प्रसूताओं की मौत की बढ़ती संख्या डरावनी है।
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Banswara 4 pregnant women death raised questions Ashok Gehlot said number very scary

Banswara 4 Pregnant Women Death : कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत। फाइल फोटो पत्रिका

Rajasthan : राजस्थान के कोटा, जोधपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा के बाद अब बांसवाड़ा में 4 दिन में 4 प्रसूताओं की मौत का मामला आया है। कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने राजस्थान सरकार पर निशाना साधा। साथ ही केंद्र सरकार से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम को राजस्थान भेजने की मांग की। अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया अकांउट X पर लिखा कि प्रदेश में प्रसूताओं की मौतों की बढ़ती संख्या बेहद डरावनी, स्तब्ध करने वाली और जन स्वास्थ्य सेवा के गहराते संकट की पुष्टि कर रही है। अब बांसवाड़ा से 4 प्रसूताओं की मौत के बाद दो माह में 18 मौतों की खबर है।

अशोक गहलोत ने आगे लिखा कि सरकार की ओर से कोई जवाबदेही नहीं होना स्थिति को और गंभीर बना रहा है। इस संकट को संभालना, प्रसूताओं की जान बचाना और स्वास्थ्य प्रणाली में विश्वास को वापस लौटाना इस सरकार के बस से बाहर हो चुका है। इस सरकार की असंवेदनशीलता और गैर जवाबदेही इस संकट को बढ़ा रही है।

अशोक गहलोत ने लिखा कि मैंने कल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम को राजस्थान भेजने की मांग की थी, केंद्र सरकार को इस हालात पर गंभीरता से विचार कर तुरंत सुधारात्मक कदम लेने होंगे वरना न जाने और कितनी प्रसूताएं दम तोड़ देंगी।

बांसवाड़ा पहुंची जयपुर से चिकित्सकों की टीम

ताजा जानकारी के अनुसार जयपुर से चिकित्सकों की टीम बांसवाड़ा पहुंच गई है। पीएमओ कक्ष में सीएमएचओ, पीएमओ सहित हॉस्पिटल के सभी गायनिक विशेषज्ञों की मीटिंग चल रही हैं। चिकित्सा विभाग 4 बजे प्रेसवार्ता करेगा। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच में जुटी है, जिला कलक्टर की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।

4 दिन में नाबालिग सहित 4 प्रसूताओं की मौत, बांसवाड़ा में मचा हड़कम्प

बांसवाड़ा में महात्मा गांधी चिकित्सालय में चार दिनों के भीतर एक नाबालिग सहित चार प्रसूताओं की मौत के बाद चिकित्सा विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया। कोटा, जोधपुर, बीकानेर और भीलवाड़ा के बाद अब बांसवाड़ा का मामला भी सामने आया है। कलक्टर डॉ. इंद्रजीत यादव ने अस्पताल पहुंचकर अधिकारियों के साथ बैठक की और पूरे प्रकरण की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित कर 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी है। चारों प्रसूताओं का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि परिजनों की सहमति के बाद शव सौंपे गए।

7 जुलाई से शुरू हुआ सिलसिला

पहली प्रसूता की मौत 7 जुलाई को हुई। 8 जुलाई को दूसरी और 10 जुलाई को दो अन्य प्रसूताओं की मौत हो गई। इनमें एक नाबालिग को ग्रामीण क्षेत्र में गर्भपात के प्रयास के बाद भर्ती कराया गया था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सवनिया निवासी लक्ष्मी, मध्यप्रदेश निवासी रेश्मा की मौत गंभीर एनीमिया से जुड़ी बताई जा रही है, जबकि लीला की मौत का संभावित कारण सिजेरियन के दौरान उच्च रक्तचाप माना जा रहा है। वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।

इन सवालों पर सबकी चुप्पी…

1- पहली ही मौत के बाद जांच टीम गठित क्यों नहीं की गई ?
2- चिकित्सकों-स्टॉफ से अब तक पूछताछ क्यों नहीं हुई ?
3- प्रसव पूर्व हुई जांचों में संबंधित जिम्मेदारों ने ध्यान क्यों नहीं दिया..?
4- एक भी प्रसूता के शव का पीएम करवाकर कारणों को जानने का प्रयास क्यों नहीं किया ..?