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बांसवाड़ा : इस्तीफों का वार, मरीजों में हाहाकार, प्रशासन की व्यवस्थाओं का बंटाधार

सेवारत चिकित्सकों के ड्यूटी पर न होने के कारण लोगों को नहीं मिल पाई चिकित्सकीय सेवाएं, जिले में आयुष चिकित्सकों ने संभाली कमान, रैफर से लोग परेशान

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बांसवाड़ा. प्रदेश स्तर पर सेवारत चिकित्सकों के द्वारा इस्तीफा देने के बाद जिले में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चौपट हो गई। वहीं, चिकित्सकों की गैरमौजूदगी में लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की आेर से की गईं सारी व्यवस्थाएं फेल हो गईं। जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ा। कमोबेश यही हाल पूरे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का रहा। महात्मा गांधी अस्पताल में जहां एक इंटर्न, आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सकों ने मोर्चा संभाला वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति की गई। लेकिन प्रशासन के प्रयासों से खासा लाभ नहीं हुआ। अस्पताल में चिकित्सकों की गैर मौजूदगी का साफ-साफ असर देखने को मिला। जिस कारण लोगों को उपचार के लिए भटकना पड़ा। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी उपचार के नाम पर महज खानापूर्ति ही नजर आई।

एमजी में ४४ की बजाय सिर्फ एक डॉक्टर वो भी इंटर्न

जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महात्मा गांधी में जहां रोजाना सैकड़ों की आेपीडी होती है। वहां सोमवार को सिर्फ इंटर्न चिकित्सक के भरोसे लोगों को उपचार मिला। इसके आलावा ३ आयुर्वेद और एक यूनानी चिकित्सक ने रोजमर्रा की तरह लोगों को चिकित्सकीय सेवाएं दी।

यूनानी और आयुर्वेद बना सहारा

एलोपैथी चिकित्सकों के उपस्थित न होने के कारण सोमवार को यूनानी और आयुर्वेद में मरीजों की संख्या में खासा इजाफा हुआ। यूनानी चिकित्सक जहांआरा अंसारी ने बताया कि रोज तकरीबन १०-२० की आेपीडी होती है। जबकि सोमवार को सिर्फ दिन में ही ३० की ओपीडी हुई और शाम को मिलाकर ४५ की ओपीडी रही। वहीं, आयुर्वेद चिकित्सक गणेश शंकर उपाध्याय ने बताया कि रोज की अपेक्षा मरीजों की ज्यादा भीड़ रही। यहां भी सोमवार को १०० की आेपीडी रही।

कुछ चिकित्सक पहुंचे

एक ओर जहां प्रदेश में चिकित्सक ड्यूटी पर नहीं गए। वहीं, महात्मा गांधी अस्पताल में कुछ चिकित्सक पहुंचे। लेकिन इन चिकित्सकों ने आेपीडी में मरीजों का उपचार नहीं किया। सुबह के समय पीएमओ डॉ. दीपक नेमा, डॉ. एनएल चरपोटा, डॉ. हरीश लालवानी और डॉ. हितेन व्यास अस्पताल पहुंचे। इसके अतिरिक्त अन्य कोई चिकित्सक अस्पताल नहीं पहुंचा।

इमरजेंसी में लगाया चिकित्सक,भर्ती की पॉवर नही

चिकित्सकों के न होने के कारण पीएमओ के निर्देश पर इमरजेंसी सेवाओं के लिए आयुर्वेद चिकित्सक की इमरजेंसी में ड्यूटी लगा दी गई। लेकिन उन्हें मरीजों को भर्ती करने की अनुमति नहीं दी गई। जिस कारण इमरजेंसी में आने वाले मारीजों को भर्ती के लिए भटकना पड़ा। इसके लेकर आयुर्वेद चिकित्सक उपाध्याय ने बताया कि वे मरीजों की भर्ती नहीं कर सकते। इसकी उन्हें अनुमति नहीं है। वहीं, प्रबंधन की इस खामी के बागीदौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से रैफर पांच वर्षीय हितेश पुत्र भरत को उपचार के लिए काफी भटकना पड़ा। हितेश के नाना मनोहर लाल ने बताया कि नाती को काफी तेज बुखार है। लेकिन यहां बच्चे को भर्ती नहीं किया जा रहा है। काफी देर से परेशान हो रहे हैं। लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। काफी देर जद्दोजहद के बाद उन्हें उसी अवस्था में निजी चिकित्सालय की ओर रुख करना पड़ा।

लैब में भी सन्नाटा

रोजाना तकरीबन हजार तक जांच करने वाली महात्मा गांधी अस्पताल की लैब में सोमवार को रोज की अपेक्षा आधी जांच भी नहंीं हुई। इसको लेकर लैब अधिकारी ने बताया कि यहां रोज तकरीबन २०० से २५० मरीजों की एक हजार के आसपास जांच होती हैं। वहीं, सोमवार को सुबह की ओपीडी में महज ५० मरीज ही जांच के लिए पहुंचे।


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