
बांसवाड़ा. बांसवाड़ा-रतलाम मार्ग पर माही नदी पर 1.27 किलोमीटर लंबे तैंतीस साल पुराने महाराणा प्रताप सेतु (गेमन पुल) की आयु बढ़ाने की कवायद हो रही है। बूढ़े होते पुल की मजबूती में कुछ कमी आने की स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया है कि ताकि इस पर आवाजाही सुरक्षित बनी रहे। पुल को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए इन दिनों ‘मास्टिक’ किया जा रहा है। पुल के करीब 30 फीसदी हिस्से में ‘मास्टिक’ किया जा चुका है और शेष हिस्से के एक भाग में कार्य चल रहा है।
महाराणा प्रताप सेतु पर चल रहा कार्य राजस्थान स्टेट रोड डवलपमेंट कॉर्पोरेशन की ओर से कुछ समय पूर्व थॉट्स कंसलटेंट प्रालि से सर्वे कराया गया। इसकी रिपोर्ट में पुल के कमजोर होने की स्थिति सामने आने पर डीपीआर बनाई गई और कार्य के लिए टेंडर किए गए। इसके बाद नई दिल्ली की हरक्यूलस स्ट्रक्चर सिस्टम कंपनी की ओर से कार्य किया जा रहा है। मौके पर मौजूद कंपनी प्रतिनिधि अमन गुप्ता के अनुसार पुल पर ‘मास्टिक’ किए जाने से इसकी आयु करीब 10 से 15 साल और बढ़ जाएगी। इससे पुल कमजोर नहीं होगा। ‘मास्टिक’ के बारे में पूछने पर बताया कि कोरस एग्रीकेट और फाइन एग्रीकेट के साथ डामर की लेयर बिछाई जाती है। इससे पुल की सीमेंट-कंकरीट सडक़ में बारिश आदि का पानी नहीं जाएगा और पुल के किनारे आउटलेट से बांध के बेकवाटर में बह जाएगा।
यह होंगे काम
गेमन इंडिया की ओर से निर्मित इस पुल के दोनों ओर क्षतिग्रस्त भाग, इसके सभी 27 स्पान के क्षतिग्रस्त हुए हिस्सों की मरम्मत की जाएगी। उसके साथ लगे बेयरिंग को बदला जाएगा। साथ ही पुल के दोनों ओर बनी रैलिंग की भी मरम्मत की जाएगी। गौरतलब है कि इस पुल पर यातायात का भारी दबाव बना रहा है और करीब आठ सौ से एक हजार वाहनों की प्रतिदिन आवाजाही बनी रहती है।
संभाग में सबसे बड़ा पुल
1.27 किलोमीटर है पुल की लंबाई
7.50 मीटर है पुल की चौड़ाई
27 स्पान है पुल पर, जिसमें 25 स्पान 46.06 मीटर के
44.26 मीटर के अंतिम दो स्पान
1984 में 17 जून को हुआ था पुल का उद्घाटन
Published on:
07 Nov 2017 09:56 pm
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