
बांसवाड़ा. पानी में अठखेलियां करते, मुक्त गगन में उड़ते परिन्दे, प्रवासी परिन्दों को निहारते पर्यटक, वनस्पति आदि से उकेर कर बनाई रंगोली और 5008 दीयों से जगमग मंदिर और श्रद्धालुओं में दीपमालिका सजाने की होड़। कुछ ऐसा ही नजारा कार्तिक पूर्णिमा पर देवदिवाली उत्सव पर सिद्धि विनायक मंदिर दिखाई दिया। वहीं शहर के देवालयों में दर्शनों और दीप प्रज्वलित करने श्रद्धालु उमड़े। देव प्रबोधनी एकादशी के बाद यह पहला त्योहार माना जाता है। इसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है। साथ ही सावो की धूम भी शुरू हो जाती है। देव दिवाली के दिन शहर के सभी मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। लोगों ने भी पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
सिद्धि विनायक मंदिर में बर्ड फेयर थीम पर आधारित रंगोली आकर्षण का केन्द्र रही। रंगोली को शिवशंकर वैष्णव एवं आशीष शर्मा ने नयनाभिराम रंगों से जीवंत बना दिया। यहां भागवत कथा वाचिका श्रीकृपा दीदी ने कहा कि धार्मिक पर्यटन बढ़ाने में ऐसे आयोजन आवश्यक है । उन्होने देव दिवाली का महत्व बताते हुए कहा कि शालिग्राम-तुलसी के विवाह उत्सव को देवता पांच दिन तक मनाते हैं। पूर्णिमा के दिन विदाई होती है और दीपदान करते हैं। आज के दिन जय, तप, व्रत, स्नान तथा दीपदान करने का अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।
इस अवसर पर गणेश भक्त मण्डल अध्यक्ष डा. दीपक द्विवेदी, सुरेश गुप्ता, जयप्रकाश पण्ड्या, इन्द्रशंकर झा, देवेन्द्र शाह, विनोद दोसी, परेश सागवाडिय़ा, रौनक पुरोहित, जगदीश सागवाडिया, दिपेश उपाध्याय, कंचन पंचाल, सुमन भट्ट एवं विनय सेठिया ने स्वागत किया। मंदिर में 56 भोग की आकर्षक झांकी सजायी गई। इससे पूर्व पं. विनय भट्ट के आचार्यत्व तथा जयन्त द्विवेदी व धर्मेन्द्र त्रिवेदी के सह आचार्यत्व में महापूजा में गीता भगवतीशंकर द्विवेदी ने भाग लिया।
इधर, शहर के महालक्ष्मी चौक, वनेश्वर शिवालय परिसर, राधाकृष्ण मंदिर, द्वारिकाधीश मंदिर, मंदारेश्वर, चारणेश्वर, अंबामाता, कालिकामाता आदि देवालयों में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर दर्शन किए। शहर के सूरजपोल से लेकर मोक्षधाम के मार्ग पर महिलाओं ने सडक़ के दोनों छोर पर दीपमालिका सजाई।
Published on:
04 Nov 2017 11:11 pm
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