
एमजी अस्पताल में एलाइजा टेस्ट की सुविधा नहीं, डेंगू मरीज में बीमारी का स्तर जानने में मददगार है ये टेस्ट
बांसवाड़ा. जिले के सबसे बड़े एमजी अस्पताल में नब्बे बच्चों की मौत के मामलो के बाद भी लापरवाही कम होने का नाम नहीं ले रही है। प्रदेश में डेंगू के पैर पसारने के हालात के बीच अस्पताल में डेंगू की जांच की पुख्ता व्यवस्था तक नहीं है और इससे मरीजों को तत्काल सटीक उपचार मिलने की संभावनाएं क्षीण हैं। गौरतलब है कि इस वर्ष जिले में 246 सैम्पल लिए गए, जिनमें से तीन रोगियों में डेंगू की पुष्टि हुई है।
ऐसे हो रहा सांसों से खिलवाड़
गौरतलब है कि डेंगू से पीडि़त मरीज में बीमारी का स्तर जानने के लिए एलाइजा टेस्ट आवश्यक है, लेकिन लैब में एलाइजा टेस्ट किट ही उपलब्ध नहीं है। सिर्फ एनएस1 और आईजीजी और आईजीएम नामक टेस्ट से काम चलाया जा रहा है। इन दोनों टेस्ट के जरिए मरीज में सिर्फ डेंगू की पुष्टि ही की जा सकती है। इस कारण मरीजों का उपचार करने में चिकित्सकों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
इसलिए जरूरी है एलाइजा
आजाद चौक डिस्पेंसरी चिकित्सा प्रभारी डॉ. निलेश परमार ने बताया कि डेंगू की पड़ताल के लिए एलाइजा टेस्ट ही बेहतर है। एलाइजा टेस्ट न होने की सूरत में प्लेटलेट्स काउंट के आधार पर उपचार करना पड़ता है। जबकि एलाइजा टेस्ट के बाद सटीक उपचार तत्काल प्रारंभ किया जा सकता है।
गत साल सुविधा थी, इस बार नहीं है
इस मामले मे लैब प्रभारी डॉ. धीरज खन्ना का कहना है कि इसे लेकर हम क्या कर सकते हैं। निशुल्क जांच योजना में एलाइजा टेस्ट है ही नहीं जबकि गत वर्ष लैब में एलाइजा टेस्ट की सुविधा थी और यह व्यवस्था मरीजों के हित में अस्पताल प्रबंधन की ओर से कराई गई थी।
246 सेम्पल लिए इस वर्ष
3 रोगियों में पुष्टि
Published on:
01 Nov 2017 08:42 pm
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