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राजस्थान में जीत के सूरमा रहे हरिदेव जोशी

बांसवाड़ा.Rajasthan Election Special Story : आजादी के बाद वागड़ अंचल शिक्षा, स्वास्थ्य, आवागमन के संसाधनों की दृष्टि से पिछड़ा रहा, किंतु राजनीतिक दृष्टि से अग्रणी रहा और राज्य की राजनीति में कई कीर्तिमान स्थापित करने में अपनी अहम भूमिका निभाई।

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बांसवाड़ा

राजस्थान का रण

बांसवाड़ा.Rajasthan Election Special Story : आजादी के बाद वागड़ अंचल शिक्षा, स्वास्थ्य, आवागमन के संसाधनों की दृष्टि से पिछड़ा रहा, किंतु राजनीतिक दृष्टि से अग्रणी रहा और राज्य की राजनीति में कई कीर्तिमान स्थापित करने में अपनी अहम भूमिका निभाई।
इस अंचल ने अपने एक बेटे को पूरे विश्वास से सिरआंखों पर रखा और एक या दो बार नहीं, दस बार राज्य विधानसभा में भेजा। बांसवाड़ा में हरिदेव जोशी ने जनता का ऐसा ही विश्वास जीता कि द्महारद्य उन्हें कभी छू नहीं पाई। उनका यह रिकार्ड अब तक अटूट है। राजनीति में राजनीतिक दलों और नेताओं की परीक्षा जनता का विश्वास जीतने की होती है। वर्तमान समय में इस परीक्षा में राजनीतिक दलों से जुड़े अधिकांश नेता अनुत्तीर्ण हो जाते हैं, लेकिन तीन बार मुख्यमंत्री रहे स्व. हरिदेव जोशी लगातार दस विधानसभा चुनाव जीतने वाले प्रदेश के एकमात्र विधायक रहे। उन्होंने पहला चुनाव डूंगरपुर सामान्य सीट से 1952 में जीता। फिर 1957 व 62 में अपने गृह जिले बांसवाड़ा जिले की घाटोल सामान्य सीट से जीत हासिल की। इसके बाद 1967 से लेकर 1993 तक वे बांसवाड़ा सामान्य सीट से लगातार सात बार विधायक चुने गए।
डामोर छह बार जीते
जिले की कुशलगढ़ सीट पर सर्वाधिक छह बार फतेहसिंह विधायक बने। 1980 में वे लोकदल के टिकट पर विधायक बने। इसके बार 1990 से लेकर 2008 तक हुए पांच विधानसभा चुनाव में फतेहसिंह ने जनता दल के प्रत्याशी के रूप में लगातार जीत हासिल की। 2013 व 18 के चुनाव में उन्हें पराजय झेलनी पड़ी। वहीं जिले में दानपुर सीट से बहादुर भाई और घाटोल से नवनीतलाल निनामा ने जीत का चौका लगाया है।
जनता लहर में भी जीते
पुराने कांग्रेस कार्यकर्ता बताते हैं कि 1977 की जनता लहर में हरिदेव जोशी को कई कार्यकर्ताओं ने चुनाव नहीं लडऩे की राय दी, किंतु उनका मानना था कि प्रतिकूल परिस्थितियों में चुनाव नहीं लडऩे से कार्यकर्ता निराश हो जाएंगे। उन्होंने चुनाव में गांव-गांव पैदल घूमकर जन संपर्क किया। गांव-गांव, गली-गली में जोशी को पैदल देखकर मतदाता उनकी बलाइयां लेते थे। चुनाव हुए और विजयी रहे।