
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में बन रहा परमाणु बिजलीघर देश में होगा सबसे सुरक्षित, जानिए क्या है वजह...
बांसवाड़ा. बांसवाड़ा में न्यूक्लियर पावर कार्पोरेशन इंडिया लिमिटेड की ओर से स्थापित होने वाला परमाणु बिजलीघर विकिरण आदि की दृष्टि से सबसे सुरक्षित होगा। पूरी यूनिट भारतीय तकनीकी पर ही आधारित होगी। परमाणु बिजलीघर के अन्तर्गत प्री-प्रोजेक्ट कार्य भी आरंभ हो गए हैं। अब तक की कार्ययोजना अनुसार सभी कार्य निर्धारित समय पर होने से इसका शिलान्यास वर्ष 2022 के अंत या 2023 के आरंभ में हो जाएगा। बांसवाड़ा में एनपीसीआईएल की ओर से स्थापित किए जाने वाले परमाणु बिजलीघर में सात सौ-सात सौ मेगावट की चार यूनिट लगनी है। स्वदेशी तकनीकी से निर्मित होने वाला यह दाबित भारी पानी संयंत्र रहेगा। केंद्र सरकार से स्वीकृत इस महत्वपूर्ण परियोजना के तहत कटुम्बी, रेल, बारी, सजवानिया, आड़ीभीत और खाण्डियादेव में 665 हैक्टेयर भूमि अवाप्त की है। इसमें से करीब 60 हैक्टेयर भूमि खाण्डियादेव में टाउनशिप के लिए रखी गई है। इस प्रोजेक्ट को 2022 के अंत या 2023 के आरंभ तक एस्टीमेट किया है और इस अवधि में शिलान्यास होगा। शिलान्यास के बाद छह साल में बिजलीघर का निर्माण पूर्ण कर बिजली उत्पादन शुरू करना प्रस्तावित है। हर यूनिट में एक-एक साल का अंतर रहेगा।यह कार्य हुए आरंभएनपीसीआईएल के अधिशासी अभियंता मयूर गुप्ता के अनुसार खांडियादेव में टाउनशिप के लिए चारदीवारी का निर्माण कार्य आरंभ कर दिया गया है। चारदीवारी करीब साढ़े चार किलोमीटर बने। वहीं प्लांट की चारदीवारी के लिए निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है और कार्यादेश जारी होना शेष है।अगले चरण में यह कामइस महत्वाकांक्षी परियोजना के अन्तर्गत आगामी डेढ़ से दो वर्ष में तीन महत्वपूर्ण होने हैं। सबसे महत्वपूर्ण भूमि का विश्लेषण होना है। इसके लिए संबंधित क्षेत्र की भूमि में गड्ढे खोदे जाएंगे और जांच-परख होगी। इसके लिए स्थान भी चिह्नित कर लिए हैं। निर्धारित मापदंड के अनुसार भूमि विश्लेषण इसलिए भी जरूरी होगा, ताकि भूकंप प्रतिरोधी डिजाइन तैयार की जा सके। इसके अतिरिक्त साइटिंग कंसेन्ट के अन्तर्गत परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड से विकिरण संबंधी लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही जन सुनवाई की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद अब पर्यावरण संबंधी क्लीयरेंस प्राप्त करने आवश्यक दस्तावेज भी जमा करा दिए गए हैं।35 परिवारों ने दी सहमतिइधर, भूमि अधिग्रहण से विस्थापित हुए परिवारों के लिए हरियापाड़ा में 100 मकानों की आवासीय कॉलोनी की स्वीकृति मिल चुकी है। इसकी निविदा प्रक्रियाधीन है। विस्थापित परिवारों में से 35 ने लिखित में मकान चाहने की सहमति दी है। वहीं करीब 1200 परिवारों ने मकान के बदले राशि ले ली है। शेष के जवाब का इंतजार है।आंकड़ों पर नजर2012 में सरकार से मंजूरी40 हजार करोड़ की प्रस्तावित लागत665 हैक्टेयर भूमि अवाप्त2022 के अंत तक प्रोजेक्ट की शुरुआत700 मेगावाट की चार यूनिट होगी स्थापित
Published on:
10 Jan 2020 11:52 am
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