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बांसवाड़ा. आबकारी विभाग की अनदेखी, मयखानों की गलियों में लूट

शराब कारोबारी भर रहे जेब, एमआरपी से अधिक राशि वसूलने का मामला

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Banswara , Selling, Liquer, charging, amount, MRP

बांसवाड़ा. आबकारी विभाग की अनदेखी की चलते यहां मयखानों की गलियों में लूट सी मची हुई है। इसके चलते ग्राहक की जेब कट रही और शराब कारोबारी अपनी जेबें भरने में लगे हुए हैं। हालत ये है कि जिला मुख्यालय पर ही आबकारी विभाग से अनुज्ञाधारी शराब की दुकानों पर ग्राहकों की जेबें काटी जा रही हैं। इसके बावजूद भी आबकारी विभाग की ओर से इस ओर पुख्ता कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

कई कारोबारियों ने तो अपने अपनी दुकानों से शराब की दरों वाला बोर्ड ही गायब कर दिया है। जिन्होंने बोर्ड लगा रखा है वे भी निर्धारित कीमत के अनुसार शराब की बिक्री नहीं कर रहे हैं। एेसे में आबकारी विभाग की मिलीभगत से ओवर रेट का खेल जमकर फल फूल रहा है।

जानकारों के अनुसार यहां अधिकृ त शराब की दुकानों पर अंग्रेजी शराब से लेकर बीयर तथा देसी शराब पर अंकित मूल्य से शौकिनों से मनमानी राशी वसूली जा रही है। इसके अलावा राठ आठ बजे बाद भी कई दुकानें खुल रही हैं। फिर भी महकमे के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हुए हैं।

ये है कार्रवाईयों की स्थिति

निर्धारित मूल्य से अधिक दामों में शराब बिक्री के आबकारी विभाग की ओर से वर्ष २०१५-१६ में कुल ११ अभियोग दर्ज किए गए। वहीं इस साल अब तक करीब ११ प्रकरण दर्ज हो चुके हैं। जबकि वर्ष की समाप्ति में कई महीने शेष है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में ओवर रेट का कारोबार कितना पैर पसार चुका है। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन प्रकरणों में सबसे ज्यादा प्रकरण जिला मुख्यालय के ही हैं। जबकि देहात में स्थिति और भी खराब है।

नियमों में पूरा प्रावधान

विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अनुज्ञाधारी अगर एमआरपी से अधिक राशि में शराब की बिक्री करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार अभियोग दर्ज करने के आबकाराी आयुक्त के स्पष्ट निर्देश हैं। इन नियमों के तहत अगर किसी अनुज्ञाधारी के खिलाफ तीन प्रकरण दर्ज होते हैं तो उसका अनुज्ञापत्र निरस्त करने के भी प्रावधान हैं।

इतना ही नहीं विदेशी मदिरा एवं बीयर की एमआरपी की सूची और विभागीय टोल फ्री नंबर का सूचना पट्ट अनुज्ञाधारी की ओर से दुकान पर लगाने के स्पष्ट निर्देश हैं। इसके बाद भी अधिकांश की ओर से इन नियमों की धज्जियां उड़ा रखी हैं। इसके अलावा पहली बार प्रकरण दर्ज होने पर दस हजार का जुर्माना, दूसरा प्रकरण दर्ज होने पर २५ हजार तथा तीसरे प्रकरण पर ५० हजार$ जुर्माने के साथ प्रकरण आयुक्त स्तर तक चला जाता है।