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बांसवाड़ा : अनाथ आश्रम में 24 बच्चे गंभीर चर्म रोग के शिकार, मासूमों के हाथों पर घाव से रिसता खून

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बांसवाड़ा : अनाथ आश्रम में 24 बच्चे गंभीर चर्म रोग के शिकार, मासूमों के हाथों पर घाव से रिसता खून

बांसवाड़ा. शहर के बाहुबली कॉलोनी में स्थित निराश्रित बाल गृह में गंदगी और जिम्मेदारों की बेपरवाही के कारण 24 मासूम स्केबीज (त्वचा संबंधी बीमारी) के शिकार हो गए, जिन्हें सोमवार को महात्मा गांधी चिकित्सालय ले जाया गया। वर्तमान में निराश्रित बाल गृह में तकरीबन 43 बच्चे निवासरत हैं, जिनमें 24 बच्चे त्वचा की संक्रमित बीमारी स्केबीज से ग्रसित हैं।

20 दिनों से नहीं ली सुध
निराश्रित बाल गृह के इन बच्चों की समस्या कोई एक-दो दिन में नहीं उपजी है, बल्कि बच्चे तकरीबन 20 दिनों से इस समस्या से जूझ रहे हैं। निराश्रित बाल गृह के कार्मिक ने बताया कि तकरीबन 15 से 20 दिन पूर्व 5-6 बच्चों में यह समस्या हुई थी। तब बीमारों का उपचार करा दिया गया था। लेकिन अब कई बच्चों को बीमारी हो गई।

बच्चों के हाथों में घाव, रिसता खून
निराश्रित बाल गृह प्रबंधन की लापरवाही के कारण बच्चों की स्वास्थ्य संबंधी समस्या इतनी विकट हो गई कि बच्चों के शरीर पर जहां-जहां चकते और दाने पड़े हुए हैं। जिनसे अब खून रिसता रहा है। पांच-पांच, छह-छह वर्ष उम्र के इन बच्चों के हाथों में बड़े-बड़े दाने हैं।

जहां-तहां कचरे का ढेर, गंदगी की भरमार
निराश्रित बाल गृह प्रबंधन एक ओर जहां साफ-सफाई का दावा कर रहा है वहीं, असलियत बिल्कुल जुदा है। निराश्रित बाल गृह में गंदगी का अंबार लगा है। परिसर के एक कोने में कचरे का ढेर और वॉशबेसिन में गंदगी का अंबार। पक्के फर्श पर धूल की परत चलने पर साफ-साफ मसहूस होती है।

प्रबंधन का तर्क
बच्चों की बीमारी को लेकर वार्डन ने बताया कि बच्चों को पूर्व में भी समस्या हुई थी, तब उपचार कराया गया था। लेकिन बच्चे गांव में जाते हैं और वहां फिर बीमार हो जाते हैं। निराश्रित बाल गृह में साफ-सफाई का पूर्ण ध्यान रखा जाता है और बच्चों की किसी समस्या के प्रति सभी कार्मिक सचेत भी रहते हैं। हम सभी बच्चों का स्वयं के बच्चों की तरह पालन पोषण करते हैं।

ऐसे समझें स्केबीज
खाज या स्केबीज त्वचा से जुड़ी एक संक्रामक बीमारी है , जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर तेजी से दूसरे व्यक्ति में फैलती है। स्केबीज या खाज होने पर व्यक्ति को शरीर के विभिन्न हिस्सों में तेज खुजली महसूस होती है और अगर किसी परिवार में एक व्यक्ति को यह बीमारी हो तो पूरे परिवार के सदस्यों को स्केबीज होने की संभावना रहती है। यह बीमारी मैट्स (घुन) के कारण होती है। यह परजीवी त्वचा में छेद बनाकर रहते हैं और अंडे देते हैं। घुन के लार्वा व्यक्ति के स्किन के ऊपरी परत पर चिपका होता है और यहीं पर परिपक्व होकर शरीर के अन्य हिस्सों में फैलता है।

इन पर है घातक
3 से 15 वर्ष के बच्चों को तेजी से चपेट में लेती है। जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम है उन्हें जल्द चपेट में लेती है। समूह में रहने मसलन स्कूल, अनाथ आश्रम यह ऐसे किसी स्थान पर जहां लोग समूह में रहते हैं वहां संक्रमण की संभावना अधिक रहती है। सर्दी या बारिश थमने के बाद फैलने की संभावना ज्यादा।

इसलिए फैलने की रहती है संभावना
यह संक्रमित बीमारी एक-दूसरे को छूने, संक्रमित व्यक्ति के कपड़े, चादर या तौलिया का उपयोग करने, मिट्टी में खेलने, साफ-सफाई के अभाव में अधिक फैलती है।
(जैसा कि त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. हरीश शर्मा ने बताया)

स्केबीज के लक्षण
यह बीमारी होने पर त्वाचा में लाल चकते पड़ जाते हैं। खुजली होती है, खुजली रात में अधिक बढ़ जाती है। घाव, त्वचा पर मोटी पपड़ी पडऩा, गंभीर खुजली के कारण खरोंच उत्पन्न हो सकती है। इसमें खुजली काफी होती है, जिससे घावों में संक्रमण उत्पन्न हो सकता है।