
बांसवाड़ा. वाल्मीकि समाज बेरोजगार संघर्ष समिति के बैनर तले नियुक्ति की मांग को लेकर धरनारत युवाओं के समर्थन में नगर परिषद के स्थायी सफाईकर्मियों की हड़ताल छठे दिन सोमवार को सरकार के निर्देशों के अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने और सफाईकर्मियों की मांगों पर निदेशालय को अवगत कराने पत्र भेजने के आश्वासन पर बनी सहमति के बाद समाप्त हो गई। दोपहर बाद सफाईकर्मी काम पर लौट आए और शहर में जगह-जगह पसरे कचरे के उठाव के साथ ही सफाई शुरू कर दी।
सोमवार सुबह नगर परिषद कार्यालय के बाहर बैठे सफाईकर्मियों और वाल्मीकि समाज के युवाओं के पास सभापति मंजूबाला पुरोहित, उप सभापति महावीर बोहरा, आयुक्त बीआर सैनी, सहायक अभियंता पीएल भाबोर पहुंचे। उन्होंने हड़ताल समाप्त करने को लेकर समझाइश की। कुछ देर बाद सभापति, आयुक्त आदि नगर परिषद कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने बंद कमरे में बैठक की। तब परिषद के एक कार्मिक को भेजकर सफाईकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर वार्ता की। वार्ता में पार्षद देवबाला, कमल हरिजन, मांगीलाल हरिजन, धनुष सहित अन्य शामिल हुए।
वार्ता में परिषद अधिकारियों ने सफाईकर्मियों की नियुक्ति सहित विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की और स्वायत्त शासन निदेशालय और राज्य सरकार को पत्र भेजने का निर्णय किया। साथ ही डोर टू डोर कचरा संग्रहण कार्य ठेके पर देने के दौरान और परिषद की ओर से बनाए गए सार्वजनिक शौचालय आदि पर बेरोजगार युवाओं को नियुक्त करने को आश्वास्त किया, जिस पर सहमति व्यक्त की गई। इस दौरान देवबाला ने कहा कि सहमति बनने संबंधी जो भी बातचीत हुई है, उसकी जानकारी धरनारत सफाईकर्मियों को दी जाए और सरकार को भेजे जाने वाले पत्र भी वहीं लेंगे।
धरनास्थल पर पढ़ा पत्र
सहमति बनने के बाद सभी पुन: धरनास्थल पहुंचे। यहां उपसभापति बोहरा ने सरकार और निदेशालय को भेजे जाने वाले पत्र को पढ़ा। इस दौरान आयुक्त ने कहा कि सरकार से निर्देश मिलते ही भर्ती प्रक्रिया अगले दिन ही शुरू कर दी जाएगी। यह सुनकर सफाईकर्मियों के चेहरे खिल उठे। आयुक्त ने कार्मिकों से जल्द ही पूरे शहर को स्वच्छ करने का आह्वान किया। इस पर दोपहर बाद से सफाई शुरू करने की बात कही।
चुंगी पुनर्भरण की राशि ‘ऊंट के मुंह में जीरा’
राज्य सरकार की ओर से नगर निकायों को चुंगी पुनर्भरण के रूप में दी जानी वाली राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। बांसवाड़ा नगर परिषद में ही कर्मचारियों के वेतन-भत्तों के लिए हर माह 40 लाख रुपए का जुगाड़ करना पड़ता है। कर्मचारियों के बकाया भुगतान सहित बढ़ती देनदारियों को देखते हुए आयुक्त ने सरकार से विशेष अनुदान मांगा है। नगर परिषद में कार्यरत कर्मचारियों का प्रतिमाह का वेतन 104.74 लाख रुपए बनता है, जबकि सरकार की ओर से चुंगी पुनर्भरण के रूप में महज 64.81 लाख रुपए दिए जा रहे हैं।हर माह 39.93 लाख रुपए कम मिलने से इस राशि की व्यवस्था परिषद को करनी पड़ रही है। परिषद की राजस्व आय प्रतिमाह करीब 15 लाख रुपए है। ऐसे में पर्याप्त राशि नहीं मिलने से देनदारियां बढ़ रही हैं।
साढ़े चार करोड़ बकाया
पर्याप्त राशि नहीं मिलने से परिषद के कर्मचारियों की ही करीब साढ़े चार करोड़ रुपए की देनदारियां हैं। अगस्त 2015 से अक्टूबर 2017 तक कार्मिकों के वेतन से काटी गई पीएफ लोन की 64 लाख 55 हजार 124 रुपए, कर्मचारी अंशदान के 53 लाख 70 हजार 450 रुपए, वर्ष 2004 के पूर्व नियुक्त कार्मिकों के पेंशन अंशदान के एक करोड़, 63 लाख 98 हजार 970 रुपए, वर्ष 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के पेंशन अंशदान के एक करोड़, 73 लाख आठ हजार सहित कुल चार करोड़ 55 लाख 33 हजार से अधिक राशि बकाया है।
इनका भी तकाजा
नगर परिषद के माथे स्ट्रीट लाइट के विद्युत बिल के एक करोड़ 70 लाख, शहरी जल योजना के बिलों की राशि 1.07 करोड़ और पूर्व में कराए गए विकास कार्यों का करीब ढाई करोड़ रुपया बकाया है। ऐसे में कर्मचारियों और विभागों की बकाया राशि नौ करोड़ 85 लाख के आसपास पहुंच गई है। इसे लेकर आयुक्त ने स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक को पत्र लिखा है। इसमें बांसवाड़ा नगर परिषद को विशेष अनुदान राशि आवंटित करने का आग्रह किया है।
Published on:
09 Jan 2018 12:40 pm
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