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बांसवाड़ा : खेल-खेल में कंकड़ ने कर दिया जीवन बर्बाद, 10 साल का बच्चा हो गया एक पैर से मोहताज

एक साल बाद जान बचाने के लिए काटना पड़ा पैर

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banswara

बांसवाड़ा : खेल-खेल में कंकड़ ने कर दिया जीवन बर्बाद, 10 साल का बच्चा हो गया एक पैर से मोहताज

बांसवाड़ा. जिन्दगी कब किस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दे कभी पता नहीं चलता है। एक साल पहले हंसने-खेलने वाला मासूम अब पैदल चलने तक को मोहताज हो जाएगा। बच्चे की मामूली सी खरोंच की टीस उसके और उसके परिवार के लिए अब ताजिन्दगी का दर्द बन गई है। जो बच्चे और परिजनों के चेहरे पर साफ-साफ दिखाई पड़ती है। गौरतलब है कि गढ़ी क्षेत्र के टिमुरवा निवासी 10 वर्षीय सुरेश इन दिनों महात्त्मा गांधी अस्पताल के अस्थि वार्ड में भर्ती है। जिसका दाहिना पैर काटा जा चुका है। सुरेश के पिता खुमान सिंह ने नम आंखों से बताया कि उसके बेटे का जीवन बर्बाद हो चुका है। जिसका अफसोस पूरे परिवार को है। खेल-खेल में लगी खरोंच यहां लाकर खड़ा कर देगी कभी सोचा नहीं था।

यह बताई घटना
खुमान सिंह ने बताया गत वर्ष गर्मियों के दिनों में सुरेश उसके छोटे भाई सुभाष के साथ घर के बाहर खेल रहा था। तभी उसके पैर में कोई कंकड़ लग गया। और उसने घर में नहीं बताया। तकरीबन दो-तीन माह बाद उसको चलने में दिक्कत आने लगी। उसके बाद उसे नौगामा में चिकित्सक को दिखाया। कुछ दिन तो बच्चे को राहत मिली। लेकिन बाद में परेशानी ज्यादा हो गई। इसके सागवाड़ा दिखाया। जहां से उसे रैफर कर दिया गया। इसके बाद उदयपुर और जयपुर में दिखाया। जहां पता चला की बच्चे की हड्डी में कैंसर हो गया है। जयपुर और उदयपुर में उसे कीमोथैरेपी भी दी गई। उसके उसे बांसवाड़ा ले आए। जहां से चिकित्सकों ने मर्ज और अधिक न बढ़े इसलिए पैर काटने की बात कही और गत माह ऑपरेशन में उसका पैर काटना पड़ा।

कैंसर ने जकड़ा था
चोट लगने के बाद सुरेश को हड्डी के कैंसर (आस्टियोसारपोमा) की समस्या हो गई। जिस कारण उसकी तकलीफ बढ़ती गई और उसे पैर गंवाना पड़ा।

काश उस दिन ही पता चल जाता
पिता खुमान ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि इस बात का हमेशा अफसोस रहगा कि बच्चे की खरोंच का इतना बड़ा परिणाम भुगतना पड़ेगा। आमतौर पर खरोंच को कौन ध्यान देता है। काश बच्चे से पहले बता दिया होता तो शायद यह नौबत नहीं आती। और बड़ा बेटा चलने फिरने को मोहताज नही होता।

बच गई जान
बच्चे को आस्टियोसारपोमा था। यह तेजी से बढकऱ पूरे शरीर को चपेट में ले लेता है। यह शरीर के सभी अंगो फेफड़े और ब्रेन को डैमेज कर देता। जिससे जान भी जा सकती थी। समय पर बच्चे का पैर काटने से उसकी जान बचाई जा सकी। वैसे तो यह मर्ज जैनेटिक होता है, लेकिन प्रबल संभावना है कि चोट लगने से भी समस्या हुई हो।
डॉ. थावरचंद मईड़ा, अस्थि रोग विशेषज्ञ