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Emotional Story: पत्नी के छोड़ने पर अवसाद में बन गया देवदास, महीनों तक कमरे में अकेले काटे दिन; फिर फिल्मी कहानी की तरह हुई घर वापसी

Banswara News: कहानी फिल्मी की मानिंद ही है, लेकिन वह बंगाल से नहीं, महाराष्ट्र प्रदेश का निकला। धीरे-धीरे गुनगुनाना शुरू किया और फिर कहना शुरू किया, मैं देवदास हूं।

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Banswara Recovery story

बांसवाड़ा।जिसका कोई नहीं, उसका भगवान होता है। यह कथ्य शहर की सड़कों पर 2022 में लावारिस भटकते मिले महाराष्ट्र के देवदास पर सटीक बैठा है, जिसकी बांसवाड़ा के राधास्वामी मानसिक-विमंदित गृह में अपनों जैसी देखभाल से याददाश्त लौटी। पहचान बताने में सक्षम होने पर मिली मदद से वह ढाई साल बाद परिजनों से मिल पाया और घर वापसी संभव हुई है। कहानी फिल्मी की मानिंद ही है, लेकिन वह बंगाल से नहीं, महाराष्ट्र प्रदेश का निकला। उसके लिए मानसिक-विमंदित गृह संचालक-केयर टेकर्स ही नहीं, कई लोगों ने सामूहिक प्रयास किए, जिससे गुमनामी के अंधेरे से निकलकर जीवन की गाड़ी फिर पटरी पर आई है।

महीनों तक खामोशी, कमरे में अकेले काटे दिन

मार्च, 2022 में बदहाल स्थिति में लाए गए करीब चालीस वर्षीय देवदास नाम-पता, कुछ भी बताने में अक्षम थे। राधास्वामी मानसिक-विमंदिन गृह के प्रभारी वेदप्रकाश शर्मा के अनुसार महीनों तक कमरे में अकेले रहे लगातार संवाद के प्रयास किए। देखने में हष्ट-पुष्ट, लेकिन खामोशी ओढ़े रखने से कोई सफलता नहीं मिली। संस्थान के प्रयासों से धीरे-धीरे उन्होंने गुनगुनाना शुरू किया और फिर कहना शुरू किया, मैं देवदास हूं, मेरा घर-परिवार सब-कुछ है।

खुद को महाराष्ट्र के गुरुद्वारे की भोजनशाला का कारीगर बताने वाले देवदास ने सभी के लिए अच्छा खाना बनाने की पेशकश की तो लगा कि याददाश्त लौट गई है। इसमें करीब दो साल से ज्यादा समय लगा, लेकिन फिर पत्नी के धोखे और वियोग की कहानी बताते हुए उसने मानसिक संतुलन बिगड़ने पर ट्रेन से रतलाम आने और किसी तरह राजस्थान में प्रवेश के बाद बांसवाड़ा में यहां तक पहुंचने की दास्तां बताईं। पूरी तरह ठीक हो चुके देवदास ने पिता पांडुरंग तापीराम आयरे, मां मथुराबाई आयरे के अलावा पत्नी आशा का नाम बताया, जो छोड़ गई थी। साथ ही महाराष्ट्र के धूले जिले में सड़गांव का निवासी बताने पर सभी परिजनों तक पहुंचने के लिए सक्रिय हुए।

बंद मिले नंबर, गुरुद्वारे से मिले संकेत

राधा स्वामी सोसायटी के सचिव भुवनेश्वर शर्मा ने बताया कि देवदास के बारे में जानकारी देने पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक गौतमलाल मीणा और बाल कल्याण समिति अध्यक्ष दिलीप रोकड़िया, चाइल्डलाइन के कमलेश बुनकर सहित कई लोगों ने उसके परिवार को तलाशने के प्रयास किए। फिर गुरुद्वारे की बात पर आसपास के नंबर मिले और संपर्क पर देवदास की बताई कहानी सही मालूम हुई। उसके बाद कड़ी से कड़ी जुड़ती गई और देवदास के गांव के सरपंच बसंत भूषण चौहान से संवाद पर उन्होंने पुष्टि की। फिर देवदास के भाई शिव एवं काका को भेजने की बात कही। 2 दिन पूर्व काका-भतीजा यहां आए तो उन्हें देखकर देवदास लिपटकर फफक उठा।

इत्तेफाक से मुआयने पर मुलाकात

शनिवार को देवदास की रवानगी तय हुई। इसी दौरान मानसिक-विमंदित गृह का मुआयना करने हाईकोर्ट जज मनोज गर्ग पहुंचे। उन्होंने भी देवदास का मामला जानकर बांसवाड़ा में सेवाओं को सराहा।

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