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कभी बहाने बनाकर क्रिकेट खेलने जाते थे, आज है फील्डिंग कोच

आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के फील्डिंग कोच एवं पांडिचेरी हेड कोच दिशांत याग्निक बांसवाड़ा पहुंचे।

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Exclusive interview cricket fielding coach Dishant Yagnik

दिशांत याग्निक

वरुण भट्ट/बांसवाड़ा। आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के फील्डिंग कोच एवं पांडिचेरी हेड कोच दिशांत याग्निक बांसवाड़ा पहुंचे। मूलत: जिले के निवासी दिशांत ने शनिवार को राजस्थान पत्रिका कार्यालय में विशेष बातचीत में क्रिकेट के अब तक के सफर के अनुभव साझा किए। साथ ही भविष्य के सपनों के साथ ही बांसवाड़ा में क्रिकेट व खिलाडिय़ों को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य को लेकर अपनी मंशा जाहिर की।

उन्होंने उनके क्रिकेट के शुरूआत से अब तक में खेल मैदान की स्थितियां जस की तस होने के हालातों पर चिंताजताई, साथ ही यह भी कहा कि जिला कलक्टर अंकित कुमार सिंह का क्रिकेट से विशेष लगाव होने से डीसीए एवं प्रशासन स्तर से मैदान की पहल शुरू करना अच्छे संकेत है। इस दौरान शारीरिक शिक्षक कपिल जोशी भी मौजूद रहे। दिशांत से बातचीत के प्रमुख अंश:

पत्रिका: आपका क्रिकेट का अब तक का सफर क्या रहा।
दिशांत: जिले में सेवालाल याग्निक के नाम से होने वाली क्रिकेट प्रतियोगिताएं देखकर इस दिशा में आगे बढ़ा। उन दिनों क्रिकेट का काफी माहौल हुआ करता था। 1991 में कुशलबाग मैदान में नाइट क्रिकेट मैच मेरे लिए टर्निंग पाइंट था। यहां दर्शकों की भीड़ व खिलाडिय़ों के प्रति उत्साह देखने के बाद मानस बनाया कि मैं भी खेलूंगा तो लोग ऐसे ही स्नेह देंगे। इसी के बाद सफर आगे बढाया। कई बार स्कूल से बहाने बनाकर निकल जाता था क्रिकेट खेलने के लिए।

पत्रिका: बांसवाड़ा में सुविधाओं का अभाव है। आप किस नजरिये से देखते है।
दिशांत: जी हां यह सच है। हम खेलते थे तब भी मैदान का अभाव था, आज भी वे ही हालात है। कोच व संसाधन जरूरी है। अब प्रशासन व डीसीए मिलकर प्रयास कर रहे है। क्रिकेट में खिलाडिय़ों को मैदान स्तरीय मिले, ताकि वे आगे खेलने पर मैदान की समझ के बाद आगे का प्रदर्शन बेहतर कर सके। अब क्रिकेट की दिशा में माहौल भी बन रहा है। आने वाले समय में बेहतर परिणाम मिलेंगे।

पत्रिका: क्रिकेट में समय के साथ क्या बदलाव महसूस करते है।
दिशांत: फास्ट फूड की मानिंद फास्ट क्रिकेट आने लगा है। टी-20 के दौर में दर्शकों का जुड़ाव भी मैच देखने पहुंचने में ज्यादा हुआ है। टी-20 क्रिकेट ने खिलाडिय़ों की क्षमताओं को बढ़ाया है। क्रिकेट मौजूदा दौर में 16 से 17 देश खेल रहे है, आने वाले 15 वर्षों में ये आंकड़ा 50 देशों तक पहुंचने की उम्मीद है।

पत्रिका: विराट कोहली व रोहित शर्मा की खबरों को लेकर क्या कहेंगे।

दिशांत- दोनों के बीच किसी प्रकार का कोई मनमुटाव नहीं है। वे दोनों कप्तानी के लिए नहीं बल्कि इण्डियन क्रिकेट कैसे बेहतर हो सके उसी को लेकर काम करते है। दोनों की सोच समान है।

पत्रिका- विराट के साथ आपके वायरल वीडियो के बारे बताए।
दिशांत-ये आईपीएल में आरसीबी व आरआर के मैच के बाद का है। मैं फील्डिंग कोच हू, ऐसे में विराट को अंदाजा नहीं था कि मैं बल्लेबाजी पर बात करुंगा, लेकिन निशुल्क कोचिंग के दौरान खिलाडिय़ों के बल्लेबाजी से जुड़े एक सवाल के बाद विराट से उनकी बेहतर बल्लेबाजी तकनीक पर चर्चा की थी। मेरा मानना हैं कि क्रिकेट में सीखने के लिए विराट की केस स्टडी बेस्ट हैं।

पत्रिका- अब तक के यादगार पल कौन से है।
दिशांत- वर्ष 2006 में देवधर ट्रॉफी सेमीफाइनल में 6 रनों की जरूरत पर सौरव गांगुली की गेंद पर कवर से उपर ***** लगाकर सेंट्रल जोन की टीम को जीत दिलाना, 2011 में सचिन तेडूलकर को स्टंप आउट करना एवं 2012 में एसएमएस स्टेडियम जयपुर में 3 गेंद पर 8 रन की जरूरत पर बेक टू बेक चौके लगाए थे। ये यादगार पल रहे है। 2013 में मुंबई इण्डियन व आरआर का मैच था। तब मैंने 37 रन की पारी में विकट के पीछे जाकर शॉट लगाया था। जिसका राहुल द्रविड़ व सचिन सर ने प्रशंसा की थी।

पत्रिका: भविष्य में आप स्वयं को कहां देखना चाहेंगे।
दिशांत: राजस्थान रायल्स व भारत के लिए क्रिकेट में बहुत कुछ करना चाहता हूं। भारतीय टीम के लिए बतौर फील्डिंग-विकेट कीपर कोच के रूप में स्वयं को देखना चाहता हूं।

पत्रिका: बांसवाड़ा के लिए क्या करने की तमन्ना है।
दिशांत: क्रिकेट में बांसवाड़ा से अधिक से अधिक खिलाड़ी विभिन्न स्तरों तक पहुंचे। ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाएं भी आगे आए। मैं भी हर संभव मदद को तैयार हूं। जनवरी माह में सात दिन का विशेष कोचिंग शिविर बांसवाड़ा में लगाएंगे।


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