
नवंबर-दिसंबर में फिर गूंजेंगी शहनाइयां
बनकोड़ा
देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ हो गए हैं। इसके साथ ही विवाह, उपनयन, मुंडन, गृह प्रवेश और उद्यापन जैसे मांगलिक कार्यों पर करीब चार माह के लिए विराम लग जाएगा। अब 20 नवंबर 2026 को देवप्रबोधिनी (देवउठनी) एकादशी के बाद ही विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होगा। विवाह के लिए नवंबर और दिसंबर में कई शुभ मुहूर्त रहेंगे।
ज्योतिषाचार्य पंडित लक्ष्मीलाल आमेटा ने बताया कि खगोल शास्त्र के अनुसार प्रतिवर्ष सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करने के बाद विवाह, उपनयन और गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इस वर्ष 16 जुलाई की रात्रि 11:19 बजे सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करने तथा इसी रात्रि 1:27 बजे गुरु के अस्त होने के कारण मांगलिक कार्यों पर रोक लग गई।
ज्योतीष शास्त्र में गुरु ग्रह को विवाह और शुभ संस्कारों का प्रमुख कारक माना जाता है। वहीं देवशयनी एकादशी से शुक्र का तारा भी अस्त हो जाएगा। इसलिए इस अवधि में भी विवाह और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।
गुरु 12 अगस्त को पुनः उदय होंगे, लेकिन चातुर्मास के कारण विवाह आदि मांगलिक कार्य नवंबर तक निषेध रहेंगे। देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा के लिए चले जाते हैं।
देवप्रबोधिनी एकादशी के बाद विवाह के लिए शुभ मुहूर्त
नवंबर - 21, 24, 25, 26
दिसंबर - 2, 3, 4, 5, 11 और 12
चातुर्मास में प्रमुख त्योहार
29 जुलाई: गुरु पूर्णिमा, शिव शयन उत्सव
9 अगस्त: कामदा एकादशी
12 अगस्त: हरियाली अमावस्या, खग्रास सूर्य ग्रहण
15 अगस्त: हरियाली तीज
17 अगस्त: नाग पंचमी
28 अगस्त: रक्षाबंधन
4 सितंबर: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
14 सितंबर: हरितालिका तीज एवं श्रीगणेश चतुर्थी
15 सितंबर: ऋषि पंचमी
19 सितंबर: राधाष्टमी
22 सितंबर: जलझूलनी एकादशी
25 सितंबर: अनंत चतुर्दशी
11 अक्टूबर: अश्विन नवरात्रि प्रारंभ
20 अक्टूबर: विजयादशमी
29 अक्टूबर: करवा चौथ
6 नवंबर: धनतेरस
8 नवंबर: नरक चतुर्दशी, रूप चतुर्दशी एवं दीपावली
10 नवंबर: अन्नकूट एवं गोवर्धन पूजा
15 नवंबर: सूर्य छठ (डाला छठ)
17 नवंबर: गोपाष्टमी
18 नवंबर: आंवला नवमी
20 नवंबर: देवप्रबोधिनी एकादशी (तुलसी विवाह व मांगलिक कार्यों का शुभारंभ)
Updated on:
26 Jul 2026 06:00 am
Published on:
26 Jul 2026 06:00 am
