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अंतिम समय तक निभाया सात फेरों के समय लिया वचन, पत्नी की मौत के 10 मिनट बाद पति ने भी छोड़े प्राण

कहते हैं, जोडिय़ां भगवान के घर से बन कर आती है। इसलिए सात फेरे लेते समय मरते दम तक साथ रहने की कसम लेते हैं।

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husband and wife died together in banswara

बांसवाड़ा/पालोदा. कहते हैं, जोडिय़ां भगवान के घर से बन कर आती है। इसलिए सात फेरे लेते समय मरते दम तक साथ रहने की कसम लेते हैं। इस वचन के निर्वाह का एक उदाहरण शुक्रवार को समीपवर्ती लसाड़ा पंचायत के गांव बस्सी चंदनसिंह में देखने को मिला। यहां एक वृद्धा की मृत्यु के दस मिनट के अंतराल में उसके पति की भी मौत हो गई। ऐसे में दोनों की अंतिम यात्रा एक साथ निकली और एक ही अर्थी पर अंत्येष्टि भी हुई।

वाकया गायरी मोहल्ले में हुआ, जबकि रूपा पुत्र नाथिया गायरी की पत्नी केसर (60) का शुक्रवार को सुबह करीब नौे बजे देहांत हो गया। इससे व्यथित रूपा (65) ने कुछ पलों में ही दम तोड़ दिया। घर में एक के बाद एक दो बुजुर्गों का साया सिर से उठने से परिवार और समाज के लोग दुखी भी हुए, लेकिन जल्द ही उन्होंने ईश्वर की मर्जी व सात फेरों के वचन को सार्थक करने की सनातनी संस्कृति मानकर अंतिम यात्रा की तैयारी में लगे।

सरपंच रामलाल दायमा ने बताया कि केसर की मौत के थोड़ी देर पहले ही रुपा ने उसे एक घूंट पानी पिलाया था। फिर जैसे ही रुपा वहां से उठकर आगे बढ़ा, थोड़ा चलने के बाद अचानक नीचे गिर गया और उसके भी प्राण पखेरु उड़ गया। घटना की चर्चा दिनभर पूरे इलाके में रही। दंपती की सामूहिक अंत्येष्टि में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

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