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भारत बंद आंदोलन : राजस्थान में यहां पशुओं का निर्यात बंद करने के लिए जैन समाज ने बंद रखे प्रतिष्ठान, निकाली रैली

‘निरीह जीवों की करुण पुकार : हमारा निर्यात बंद करो, हम बोल पाते तो करते विरोध’

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भारत बंद आंदोलन : राजस्थान में यहां पशुओं का निर्यात बंद करने के लिए जैन समाज ने बंद रखे प्रतिष्ठान, निकाली रैली

बांसवाड़ा/बागीदौरा/बड़ोदिया/कलिंजरा. पशु बोलते नहीं है, अगर बोल पाते तो केन्द्र सरकार के पशुधन निर्यात जैसे घृणित कृत्य के लिए वह भी अपनी आवाज बुलंद कर विरोध जताते। ये तो निरही जीव है। यह बात जीव दया प्रेमी केसरीमल खोडणिया ने पशुधन निर्यात रोकने की मांग को लेकर जैन समाज की ओर से 15 जुलाई को आयोजित भारत बंद आंदोलन के तहत कही। रविवार को बागीदौरा, बड़ोदिया, नौगामा व कलिजंरा के बाजार बंद रख जैन समाज ने आंदोलन का आगाज किया। इस दौरान समाज ने बागीदौरा तहसीलदार राकेश कुमार न्योल को ज्ञापन देकर मांस निर्यात तत्काल बंद करने की मांग उठाई।

सरकार के फैसले से आहत समाज
अहिंसा के प्रथम अग्रदूत भगवान महावीर के सिद्धांत अहिंसा परमो धर्म पर विश्वास रखने वाला जैन समाज मवेशियों के निर्यात के फैसले से आहत है। इस हिसांत्मक योजना को रोकने के लिए 15 जुलाई को भारत बंद आदोलन का आगाज किया गया था। इसी के चलते उपखण्ड क्षेत्र के बागीदौरा, बड़ोदिया, नौगामा व कलिजंरा के बाजार बंद रख विरोध प्रदर्शन किया गया।

यह कहा ज्ञापन में
भारत सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाए जिससे जीव दया भाव रखने वाले लोगों की भावनाओं को ठेस लगे। भारत से मांस निर्यात एवं जीवित पशुधन निर्यात पर तत्काल रोक लगाई जाए। ज्ञापन देने वालों में राजकुमार जैन, कांतिलाल खोडणिया, सुरेश खोडणिया, बदामीलाल दोसी, नाथूलाल दोसी, रतनपाल, सुरेशचन्द्र, केसरीमल मेहता, सेठ जयंतिलाल मेहता, विनोद दोसी, धनपाल मेहता सहित बड़ी संख्या में समाजजन व अन्य लोग मौजूद थे।

जताया विरोध
बड़ोदिया कस्बे में मे रविवार को जीवित पशुधन के निर्यात के विरोध में सकल जैन समाज ने रैली निकाली। जैन समाज के लोगों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर मुनि शतार सागर महाराज ससंघ के सान्निध्य व कांतिलाल खोडणिया के निर्देशन में जैन मंदिर से रैली निकाली गई। जिसमें मांस व पशुधन निर्यात बंद करो आदि नारे के नारे लगाए। मामले में प्रभावी कार्यवाही नहीं होने पर नाराजगी जताई। रैली श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर परिसर पर पहुंचकर सम्पन्न हुई। इसमें बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए।

मांस निर्यात भारतीय संस्कृति के विरुद्ध
खोडणिया ने कहा कि अहिंसा के पक्षधर रहे देश से पिछले कई वर्षों से मांस का निर्यात किया जा रहा है, जो हिन्दुस्तान की संस्कृति के विरुद्ध है। इस कृषि प्रधान देश में अन्न उत्पादन को प्रोत्साहन के बजाय जीवित पशुओं को कटने के लिए बाहर भेजकर भारतीय किसानों की आय बढ़ाने का अधर्मतापूर्ण प्रयास किया जा रहा है। बढ़ते मांस निर्यात से देश में घट रहे पशुधन के बावजूद सरकार जीवित पशु निर्यात की अनुमति क्यों दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार पशुधन का निर्यात कर पाप की कमाई से देश चलाना चाहती है। इसे जीव दया प्रेमी कभी स्वीकार नहीं कर सकते।

खोडणिया ने बताया कि नागपुर एयरपोर्ट से शारजहां को एक लख जीवित बकरों व भेड़ों का निर्यात किया जाना था किन्तु जीव दया प्रेमीयों के विरोध के चलते यह योजना रद्द कर दी गई थी। लेकिन दो-तीन दिन बाद ही सरकार ने नासिक हवाई अड्डे से 4500 मवेशी विदेश भेज दिए। जबकि यह निर्धारित मानकों के विरुद्ध कार्य था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 2014 की चुनावी रैलियों में बढ़ते मटन निर्यात से देश में घटते पशुधन पर चिंता व्यक्त की थी, अब उसी चिंता को दरकिनार कर दिया।