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बांसवाड़ा : तस्वीर को राखी बांधकर रो पड़ी शहीद भदौरिया की बहन, भाई के दोस्तों ने रक्षा सूत्र बंधवाकर दिया सुरक्षा का वचन

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बांसवाड़ा : तस्वीर को राखी बांधकर रो पड़ी शहीद भदौरिया की बहन, भाई के दोस्तों ने रक्षा सूत्र बंधवाकर दिया सुरक्षा का वचन

बांसवाड़ा. भाई- बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन पर्व पर वागड़ अंचल में रविवार को अलग अलग रंग दिखे। खुशियां बिखरी और उमंग - उत्साह के माहौल में भाइयों को राखी बांधी गई। लेकिन कुछ बहिनें ऐसी थी जिनकी आंखों से राखी बांधते समय आंसू छलक पड़े। दर्द, बेबसी और अटूट बंधन की ये तीन तस्वीरें अलग-अलग भावों को प्रकट कर रही हैं। देश पर प्राण न्यौछावर करने वाले शहीद की प्रतिमा पर बहन ने राखी बांधी तो कहीं बहन को भाई के पैर पर राखी सजानी पड़ी। एक मुस्मिल महिला ने 50 वर्ष पूर्व अपने रक्षा सूत्र बांधकर हिन्दू को भाई बनाया और उसकी मृत्यु के बाद आज भी वह अपना धर्म निभा रही है। उसकी प्रतिमा पर उसने तिलक लगाया और रक्षा सूत्र बांधे।

स्मरण : शहीद की बहन ने तस्वीर पर बांधा रक्षासूत्र
ठीकरिया . रक्षाबंधन के पर्व पर शहीद हर्षित भदौरिया की बहन जिज्ञा व उसकी बुआओं ने शहीद की तस्वीर पर राखी बांधी। राखी बांधते समय उनकी पलकें नम हो गई। इस दौरान शहीद भदौरिया के दोस्तों को भी जिज्ञा ने राखी बांधी। इस अवसर पर कस्बे सहित आस पास के अनेक गांवों मे रविवार को बहनों ने भाई की कलाई राखी बांधी। भाई बदले ने उपहार दिया। गांव के सेवक हीरालाल शर्मा ने प्रत्येक घर पर जाकर राखी बांधने की परम्परा कायम रखी। वहीं दूसरी ओर छोटे-छोट बच्चे बाल हनुमान, जैसी राखी अपने भाइयों के कलाई में बांधते नजर आए।

दर्द : कलाई नहीं है, बहन ने पैर पर बांधी भाई को राखी
बांसवाड़ा. शहर से करीब दस किलोमीटर दूर माही बैक वाटर के आला बरोड़ा गांव में बहन को रक्षा सूत्र बांधते देख हर कोई द्रवित हो जाएगा। इस जनजाति अंचल में 12 साल की शकुंतला के चेहरे पर भले ही मीठी से मुस्कान तैर रही है, लेकिन उसके भीतर उठ रहे ज्वार को भला कौन देखता। शकुंतला ने अपने 8 वर्षीय भाई अनिल निनामा को राखी तो बांधी, लेकिन पैर पर। निनामा को जन्म से ही दोनों हाथ नहीं हैं। अन्य दिनों दोनों भाई-बहन साथ-साथ खेलते हैं और हंसी ठिठोली करते हैं। लेकिन रक्षा बंधन के दिन मासूम शकुंतला की आंखें नम हो जाती हैं। क्योंकि इसी दिन उसे भाई के हाथ नहीं होने का दर्द कचोटता है।