
अस्पताल के बाहर में मौजूद पीड़ित के परिजन व इनसेट में अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट। फोटो: पत्रिका
Banswara News: बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उपखंड के पाटन थाना क्षेत्र के मोहकमपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों ने बिना जांच किए ही तीन माह की एक गर्भवती महिला का नसबंदी ऑपरेशन कर दिया। मामला जनवरी का है। महिला की तबीयत बिगड़ने पर सोनोग्राफी करवाई गई तो सामने आया कि महिला गर्भवती है। उसका गर्भ 31 सप्ताह का हो चुका है।
आमलीपाड़ा निवासी पीड़िता ने पाटन थाने व पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत देकर जिम्मेदारों पर कानूनी कार्यवाही की गुहार लगाई है। पीड़िता ने बताया कि करीब पांच माह पहले रमिला नाम की एक महिला उसके पास आई और उसने खुद को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बताते हुए कहा- तुहारे चार बच्चे हो चुके हैं, इसलिए नसबंदी करवा लो।
सरकार की ओर से सहायता राशि भी मिलेगी। पीड़िता 10 जनवरी, 2025 को उसके साथ मोहकमपुरा सीएचसी पहुंची। वहां चिकित्सक ने बिना किसी जांच के उसका नसबंदी ऑपरेशन कर दिया और प्रमाण-पत्र दे दिया।
नसबंदी ऑपरेशन के कुछ दिन बाद महिला की तबीयत बिगड़ने लगी तो वह चिकित्सक के पास गई। चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि वह गर्भवती है। इसके बाद सोनोग्राफी करवाई, जिसमें गर्भ 28 सप्ताह एक दिन का बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार गर्भ अक्टूबर, 2024 में ही ठहर चुका था। यानी ऑपरेशन के वक्त वह पहले से ही गर्भवती थी, लेकिन बिना जांच के ऑपरेशन कर दिया गया।
पीडि़ता ने आरोप लगाया कि जब वह अपनी पीड़ा व शिकायत लेकर पति के साथ मोहकमपुरा सीएचसी पहुंची तो वहां मौजूद स्टाफ और चिकित्सक ने दुर्व्यवहार किया और धमकाते हुए कहा कि अगर ऊपर शिकायत की तो ठीक नहीं होगा।
-असफल नसबंदी, महिला के फिर से गर्भवती होने पर ‘कंपेंसेशन स्कीम फॉर फेलियर ऑफ स्टरलाइजेशन (2014)’ के अनुसार जन्म लेने वाले जीवित बच्चे की स्थिति में 30,000 रुपए का मुआवजा।
-महिला की मृत्यु पर परिवार को 2 लाख रुपए तक मुआवजा।
-नसबंदी के दौरान दुर्घटना या स्थायी क्षति पर 50,000 रुपए तक मुआवजा।
यह एक गंभीर चिकित्सीय लापरवाही है। इसमें कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। महिला को मानवाधिकार उल्लंघन, मानसिक व शारीरिक पीड़ा के आधार पर मुआवज़े की मांग का अधिकार है। वह राज्य महिला आयोग, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, या उपभोक्ता न्यायालय में शिकायत दर्ज करा सकती है। उचित दस्तावेज और सोनोग्राफी रिपोर्ट के आधार पर, पीड़िता को एक लाख रुपए या अधिक का मुआवजा मिल सकता है, यदि मामला न्यायालय में प्रमाणित हो।
बीसीएमओ या सीएमएचओ, जननी सुरक्षा योजना या आरसीएच कार्यक्रम प्रभारी अधिकारी, राज्य महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, उपभोक्ता फोरम।
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यह मामला मेरे संज्ञान में भी आया है। पोर्टल पर शिकायत दर्ज की गई थी। संस्थान से संबंधित दस्तावेज मंगवाकर रिपोर्ट सीएमएचओ को भेज दी गई है। वहां से आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. गिरीश भाभोर, ब्लॉक सीएमएचओ, छोटी सरवा
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Published on:
08 Jun 2025 09:00 am
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