
सागवाड़ा. रामस्नेही संत कीर्तिराम ने कहा कि प्रभु की कथा बड़े ही दुर्लभता से मिलती है, कथा को एकाग्रता के साथ श्रवण करना चाहिए। कान्हड़दास धाम बड़ा रामद्वारा में संत ने कहा कि इंसान के अंदर एक ही मन है, इसे अच्छे कार्यों और भक्ति में लगाना चाहिए। सत्संग में वही व्यक्ति पहुंच पाता है, जिसके भीतर सच्ची भक्ति होती है। दिखावे की भक्ति से बचते हुए मनुष्य को अपने हृदय से प्रभु का स्मरण करना चाहिए। भगवान ने जीवन में सुख के साथ दुख भी दिया है, ताकि मनुष्य अभिमान न करे। जो व्यक्ति भक्ति करता है, उसका मन शांत रहता है। संत ने कहा कि कल और काल में ज्यादा अंतर नहीं है। कोई भी कार्य कल के भरोसे न छोड़ें और आज से ही भक्ति करना शुरू कर दें।
संत ने कहा कि समस्त कर्मों, गतियों, रहस्यों एवं सृष्टि.विन्यास को जानने वाला परमेश्वर है। सम्पूर्ण जगत उसी ब्रह्म की मायाशक्ति का अभिव्यक्त रूप है। जैसे सूर्य सम्पूर्ण विश्व को प्रकाश देता है, किन्तु किसी कर्म में लिप्त नहीं होता, वैसे ही आत्मा समस्त अनुभवों का साक्षी होकर भी अकर्ता और अभोक्ता रहती है। आत्मा स्वयंप्रकाश है, मन और बुद्धि उसी आत्मा के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं। समस्त वैदिक साधना का परम लक्ष्य बाह्य कर्मकाण्ड नहीं, अपितु आत्मा की पहचान है।
प्रवक्ता बलदेव सोमपुरा ने बताया कि संत प्रसाद विष्णु भावसार परिवार की ओर से रहा। ‘जनम मिला अनमोल रे, मिट्टी में न रोल रे’ एवं ‘जाग रे जाग रे जाग मुसाफिर जाग रे’ सहित कई भजन प्रस्तुत किए।
Updated on:
28 Aug 2026 06:02 am
Published on:
28 Aug 2026 06:02 am
