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बांसवाड़ा : 20 लाख लोगों के दिल के टुकड़े-टुकड़े करके, बोरिया-बिस्तर समेट के चल दिए रेलवे वाले

23 के फेर में सपने की रेल, तब खुशियां लाई अब लाखों दिलों में दर्द की सीटी बजाई, रिकार्ड और सामान उदयपुर भिजवाया, जनप्रतिनिधि मूकदर्शक बने

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बांसवाड़ा. ठीक 23 मार्च 2012 को सर्किट हाउस स्थित भवन में उत्तर-पश्चिम रेलवे का उपमुख्य अभियन्ता का कार्यालय इस उम्मीद के साथ प्रारम्भ हुआ था कि अगले चार-पांच साल में जिले के 20 लाख लोगों को आजादी के 64 साल बाद अपनी धरा पर रेल चलती देखने का सपना पूरा होगा। लेकिन ठीक 6 साल बाद 23 मार्च 2018 को ये सपना धराशायी हो गया। राज्य सरकार की बे-रुखी के चलते रेलवे को जमीन का आवंटन नहीं हुआ, इसके चलते आखिरकार रेलवे मंत्रालय ने यहां अपना कार्यालय बंद करने का निर्णय किया और शुक्रवार को सारा रिकार्ड और सामान उदयपुर भिजवा दिया गया। सब कुछ अपनी अपनी आंखों के सामने होता देखने के बाद भी जनप्रतिनिधियों में से किसी का दिल नहीं रोया, कोई हरकत नहीं हुई और इस यह संतोष करके बैठ गए हैं कि एक न एक दिन रेल जरूर आएगी। इसके लिए फिर प्रयास करेंगे। उल्लेखनीय है कि पिछले चार साल में जनप्रतिनिधि रेल मंत्री और प्रधानमंत्री तक अपनी बात पहुंचाते रहे हैँ लेकिन नतीजा सिफर रहा और अब भी वे उम्मीद का ही दामन थाम कर बैठे हैं।

रेल मंत्री से बात से आगे नहीं बढ़ी बात
प्रदेश मेंकांग्रेस के पिछले कार्यकाल के दौरान रतलाम-डूंगरपुर वाया बांसवाड़ा रेल परियोजना का काम शुरू हुआ था और प्रारम्भिक तौर पर राज्य सरकार की ओर से 200 करोड़ भी दिए गए थे। इसके बाद जिले में अर्थ वर्क के साथ-साथ पुलों का निर्माण शुरू हुआ और करीब पांच पुल भी बनकर तैयार हो गए। जैसे ही राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ वैसे ही परियोजना के खराब दिन शुरू हो गए एवं जमीन अधिग्रहण के लिए प्रभावित परिवारों को मुआवजा राशि का आवंटन नहीं किया।

इसके चलते विरोध होने लगा और अन्तत: स्थिति यह हो गई की सरकार ने यह कह कर हाथ खड़े कर दिए कि हमारे पास रेलवे परियोजना को देने के लिए पैसे नहीं हैं एवं इसका पूरा खर्च रेलवे मंत्रालय ही वहन करे। इस पर रेलवे ने 23 जून 2011 को राज्य सरकार के साथ हुए एमओयू की याद दिलाई और कहा कि दोनों को आधा-आधा अंशदान देना होगा। इसके बावजूद राज्य सरकार ने कोई रुचि नहीं दिखाई और परियोजना की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। वहीं रेल परियोजना को लेकर सांसद से लेकर मंत्रियों एवं विधायकों ने अपने स्तर पर रेल मंत्री और मुख्यमंत्री से सम्पर्क किया, लेकिन कहीं भी गंभीर रूप से प्रयास नहीं हुए।

जब चिडिय़ा चुग गई खेत...
क्या कारण रहे कि रेल परियोजना का काम बंद हो गया, इसके बारे में पूरी जानकारी लेंगे और फिर से मुख्यमंत्री से मिलकर प्रयास करेंगे।
जीतमल खांट, विधायक गढ़ी

रेलवे कार्यालय बंद होना निराशाजनक है। जिले के सभी विधायक मिलकर फिर से रेलवे का काम शुरू हो इसके लिए प्रयास करेंगे।
भीमाभाई डामोर, संसदीय सचिव

रेलवे कार्यालय क्यों बंद हो गया इसकी तह तक जाने के लिए सभी तथ्यों को देखा जाएगा और फिर से यह काम कैसे शुरू हो इसके लिए प्रयास करेंगे। केन्द्र सरकार के स्तर पर कहां कमी रही, इसकी जानकारी नहीं है।
नवनीतलाल निनामा, विधायक घाटोल

चाहते ही नहीं कि विकास हो
कांग्रेस ने रेलवे का काम शुरू कराया था और बजट देने की हामी भी भरी थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने पहले दिन से इसके प्रति कभी गंभीरता नहीं दिखाई और यह परिणाम रहा कि बड़े जतन से शुरु कराया कार्यालय भी बंद हो गया। आने वाले समय में उनको इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा।
महेन्द्रजीतसिंह मालवीया, विधायक बागीदौरा।