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Rajasthan: हिरासत में मौत पर मुआवजे की कैश डील; पुलिस ‘मौताणा’ की 27 लाख से अधिक की रकम कहां से लाई? सिस्टम पर बड़ा सवाल

यह मामला डूंगरपुर जिले के दोवड़ा थाने में हिरासत में युवक की मौत में पुलिस ने परिजनों को 27.50 लाख रुपए मौताणा राशि दी है। जिस पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।

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बांसवाड़ा

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Anand Prakash Yadav

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जितेंद्र पालीवाल

Nov 24, 2025

गोले में एसपी डूंगरपुर मनीष कुमार और मृतक दिलीप, पत्रिका फोटो

बांसवाड़ा। चोरी के शक में दिलीप अहारी (22) को 26 सितंबर की रात पुलिस ने हिरासत में लिया। तबीयत बिगड़ने पर उसकी मौत हो गई। परिजन और ग्रामीणों ने पिटाई का आरोप लगाया और पांच दिन तक कलक्ट्रेट का घेराव किया। मामला बढ़ने पर थानेदार सहित पांच पुलिसकर्मी निलंबित कर दिए गए। विरोध शांत करने के लिए पुलिस ने बिचौलियों के जरिए परिजन को 27.50 लाख रुपए कैश में थमा दिए। यह मामला डूंगरपुर जिले के दोवड़ा थाने का है। सामान्यत: सरकार हादसे या संदिग्ध मौतों में मुआवजा देती है, लेकिन संभवत: यह पहला मामला है जिसमें पुलिस ने खुद इतनी बड़ी राशि ‘मौताणा’ के रूप में दी।

मौत पर मुआवजे का सौदा… मतलब मौताणा

हादसे या संदिग्ध मौत की स्थिति में आरोपित पक्ष द्वारा बातचीत कर पीड़ित को दी जाने वाली तत्काल राहत राशि को ‘मौताणा’ कहलाती है। आमतौर पर यह पांच-दस लाख तक होता है, लेकिन पहली बार सरकारी एजेंसियों ने खुद पैसा जुटाकर इतना बड़ा मौताणा दिया। इसकी जानकारी मंत्री, सांसद, विधायक, कलक्टर और एसपी तक को है।

यह है मामला

दोवड़ा पुलिस ने थाना क्षेत्र के वसी गांव के एक स्कूल में हुई चोरी के मामले को लेकर बीते सितंबर में करालिया देवसोमनाथ निवासी दिलीप पुत्र जीवरात अहारी को डूंगरपुर शहर से हिरासत में लिया था। इसके बाद दिलीप की हिरासत में तबीयत खराब हो गई। इस पर पुलिस ने आरोपी को जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती करवाया। लेकिन आरोपी की तबीयत अधिक खराब होने पर अगले दिन पुलिस ने परिजनों को सूचना दी। इसके बाद आरोपी के परिजनों ने पुलिस पर मारपीट के आरोप लगाते हुए चिकित्सालय परिसर में भारी विरोध प्रदर्शन किया था। परिजनों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए पुलिस ने आरोपी को उदयपुर रेफर करवा दिया था। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस पर युवक की पिटाई से मौत होने का आरोप लगाया था।

पिता बोले- पुलिस ने कैश भिजवाया

हमें 27.50 लाख रुपए पुलिस ने नकद भेजे। कोई चेक नहीं दिया। समझौता वार्ता में शामिल गांव के कुछ लोगों के साथ पैसा भिजवाया गया। कोई सरकारी कर्मचारी हमारे पास नहीं आया था। सरकार की ओर से एक रुपया भी जमा नहीं हुआ। जीवराज अहारी, मृतक दिलीप के पिता (जैसा कि पत्रिका को बताया)

सरकार से कुछ नहीं

* पुलिस ने ही पैसों का इंतजाम किया। सरकार के खजाने से कोई मुआवजा नहीं दिया। बाबूलाल खराड़ी, जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री

* पुलिस और सबने इकट्ठा करके पैसा दिया है। पीड़ित प्रतिकर स्कीम में मदद का प्रावधान है। सरकार ने अभी कुछ नहीं दिया। अंकित कुमार सिंह, जिला कलक्टर, डूंगरपुर

डूंगरपुर एसपी मनीष कुमार से सवाल

प्रश्न: क्या दिलीप के परिवार से जो वादे किए थे, वे पूरे हो गए?
जवाब: सरकार की ओर से जो भी हुआ था, वह पूरा हो गया है।
प्रश्न: मुआवजे का पैसा 27.50 लाख दिया?
जवाब: जो भी डिस्कस हुआ था, वह उन्हें दे दिया।
प्रश्न: पैसा सरकार ने दिया या…?
जवाब: जो भी था,हो गया। कुछ सरकार की तरफ से, कुछ प्रशासन की तरफ से।

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