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राजस्थान में यहां है अनूठी परंपरा, घर की दहलीज पर चावल के दाने रखकर देते हैं निमंत्रण

दक्षिण राजस्थान के जनजाति क्षेत्र बांसवाड़ा में आज भी बरसों पुरानी परपंरा के तहत पीले (हल्दी से रंगे) व लाल (कुमकुम से रंगे) चावल के दाने दहलीज पर रखकर निमंत्रण दिया जाता है।

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unique tradition in banswara rajasthan

वरुण भट्ट/विनोद नायक/बांसवाड़ा। दक्षिण राजस्थान के जनजाति क्षेत्र बांसवाड़ा में आज भी बरसों पुरानी परपंरा के तहत पीले (हल्दी से रंगे) व लाल (कुमकुम से रंगे) चावल के दाने दहलीज पर रखकर निमंत्रण दिया जाता है। वागड़ी बोली में नोतरा कहे जाने वाले इस निमंत्रण में दोनों ही रंगों के चावलों के अलग-अलग मायने हैं।

दहलीज पर पहुंचने वाले चावल के रंग देखकर संबंधित परिवार यह समझ जाता है कि उसे निमंत्रण क्यों दिया गया है। इसके बाद वह अपनी सामर्थ्य के मुताबिक आर्थिक भेंट देता है। शादी समारोह में निमंत्रण के लिए पीले चावल रिश्तेदारों व परिचितों की दहलीज पर रखे जाते हैं, तो वहीं लाल चावल वांगड़ा नोतरा यानि आर्थिक जरूरत के मौकों भूमि खरीदी, मकान निर्माण, गृह प्रवेश, बीमारी सहित अन्य कारणों के लिए बतौर निमंत्रण घरों की दहलीज तक रखे जाते हैं।

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यह है नोतरा प्रथा
सामाजिक सरोकार और परस्पर सहयोग की नोतरा प्रथा पीढ़ियों से चली आ रही है। इस प्रथा में समाज में शादी-विवाह, विशेष अवसरों एवं जरूरत में होने वाले खर्चे को सहयोग के माध्यम से पूरा किया जाता है। सामाजिक स्तर पर चल रही इस प्रथा का उपयोग विगत वर्षों में शिक्षण संस्थाओं में भौतिक सुविधाओं के विस्तार के लिए राशि एकत्रित करने के लिए भी किया जाना शुरू हुआ है। गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय के माध्यम से भी इस प्रथा पर काम करने का मानस बनाया गया है।

बदलते जमाने के साथ भी कदमताल
कुछ जगह निमंत्रण पत्र छपवाने व सोशल मीडिया पर निमंत्रण भी दिया जाने लगा है। गत दिनों कुशलगढ़ क्षेत्र में एक नोतरे के कार्यक्रम में मनी ट्रांजेक्शन में एक परिवार ने क्यूआर कोड, पेटीएम जैसी सुविधा का उपयोग किया था।