
ऐतिहासिक फैसला: बांसवाड़ा में वाल्मीकि भील समाज के 281 गांवों के लोगों ने लिया शराब न पीने का संकल्प
बांसवाड़ा. कोहलाघाटी/ तलवाड़ा. वाल्मीकि भील समाज के 281 गांवों के प्रतिनिधियों ने रविवार को कोहला घाटी स्थित वाल्मीकि मंदिर परिसर में एकमत से शराब के खिलाफ बड़ा फैसला लेते हुए समाज में शराबबंदी का ऐलान किया और तय किया अब कोई शराब नहीं पीयेगा। कोई पीते हुए पकड़ा गया तो उसको जुर्माना भरना होगा। समाज की बैठक में शराब का मुद्दा उठाया तारादेवी व राधा देवी ने। उन्होंने कहा कि कई परिवारों में पति शराब पीकर मारपीट करते हैं। सारी आमदनी शराब में उड़ा देते हैं। ऐसे में बच्चों को पढ़़ा भी नहींं पाते है। कई महिलाएं भी नशे का सेवन करने लगी हैं। महिलाओं ने बैठक में संकल्प पारित करने पर जोर दिया।
तब विभिन्न चौखरों के 281 गांवों के भील समाज के सैकड़ों लोगों ने शराब नहीं पीने का संकल्प व्यक्त किया। इसका उल्लंघन करने पर जुर्माना किया जाएगा। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष मोगजी भाई मईड़़ा ने की। मुख्य अतिथि आमरेंग व विशिष्ट अतिथि प्रमशंकर कटारा, गोतमलाल, पूंजालाल, तलवाड़ा सरपंच रमेशचंद्र डिण्डोर, विठ्ला, रेमजी, रवीन्द्र थे सरपंच डिंडोर ने बताया कि सम्मेलन में 18 चौखरों के समाजजन की मंशा रही कि प्रत्येेक घर में शराब पर रोक लगे। पूरे समाज को शिक्षा से जोड़ा जाए। संचालन नाथूलाल राठौड़ ने किया। इस मौके पर पूजालाल, विठ्ला चावड़ा, रोशन, तारादेेवी, राधा देेवी, रमीला, अंंजना, रंंजना, तुलसी, फूलवंती आदि आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
विरोध प्रदर्शन जारी
जिले भर में शराबबंदी के लिए महिलाओं की ओर से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है जो अभी भी जारी है। आक्रोशित महिलाओं के इस आंदोलन को कई समाजसेवियों व संगठनों ने भी समर्थन दिया है। महिलाओं के अनुसार शराब के कारण उनके घर परिवार बर्बाद हो रहे है वहीं युवा पीढ़ी भी इसकी गिरफ्त में आ रही है। पुरुष आए दिन शराब पीकर उत्पात मचाते है और महिलाओं से मारपीट करते है साथ ही घर की आमदनी को भी शराब पीने में उड़ा देते है। वहीं अवैध शराब के अड्डे खोलकर कुछ लोग इसे प्रोत्साहित कर रहे है।
Published on:
29 Oct 2018 12:29 pm
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