
पूर्व विधायक ने बढ़ाई भारतीय जनता पार्टी की टेंशन, अपनी ही सांसद के खिलाफ खोला मोर्चा
बाराबंकी. अपनी विवादित कार्यशैली से चर्चा में रहने वाली बाराबंकी से भाजपा सांसद प्रियंका सिंह रावत की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। इस बार उनकी मुश्किल बढ़ाने का कारण कोई और नहीं बना, बल्कि उनकी अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक सुन्दर लाल दीक्षित बन गए हैं। बाराबंकी में यह नेता सबसे ज्यादा जनाधार वाला नेता माना जाता है, साथ-साथ यह नेता केन्द्रीय गृह मन्त्री राजनाथ सिंह का भी करीबी माना जाता है। इस नेता ने अपने पत्र में सांसद प्रियंका रावत पर गम्भीर आरोप लगाते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से कार्रवाई की मांग की है। सुन्दर लाल दीक्षित ने पत्र में सांसद द्वारा उच्च जाति के अधिकारी के साथ कठोर व्यवहार का जिक्र करते हुए कहा है कि सांसद का व्यवहार तो निन्दनीय है ही, साथ-साथ उनकी कार्यशैली से भाजपा की साख भी गिरती जा रही है।
पूर्व विधायक ने बीजेपी सांसद के खिलाफ खोला मोर्चा
हम बात कर रहे है बाराबंकी से भाजपा सांसद प्रियंका सिंह रावत की। जो शुरू से ही अपनी विवादित कार्यशैली से चर्चा में रही हैं। लेकिन इस बार तो बाराबंकी के वरिष्ठ भाजपा नेता और हैदरगढ़ से पूर्व विधायक सुन्दर लाल दीक्षित ने अपनी ही सांसद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आपको बता दें कि दीक्षित का इस तरह का विरोध सांसद को काफी महंगा पड़ सकता है, क्योंकि जनपद में उनसे बड़ा जनाधार वाला नेता शायद ही कोई हो। दीक्षित गृहमन्त्री राजनाथ सिंह के काफी करीबी माने जाते हैं। दीक्षित ने सांसद पर गम्भीर आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी , बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह , मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पाण्डेय से सांसद पर कार्रवाई की मांग की है।
पूर्व विधायक ने लगाए कई गंभीर आरोप
दीक्षित ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री को याद दिलाया है कि कैसे उनकी मन्शा के उलट सांसद ने अपने ही पिता को अपना प्रतिनिधि बनाकर उनके आदेशों की अवहेलना की थी। तब प्रधानमंत्री के सीधे हस्तक्षेप के बाद सांसद ने अपने फैसले को बदला था। दीक्षित ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि कैसे सांसद ने उनके ड्रीम प्रोजेक्ट सांसद आदर्श ग्राम योजना का मजाक बना कर गांव गोद लेने के बाद दोबारा गांव की ओर मुड़कर नहीं देखा। दीक्षित ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री को इस बात से भी अवगत कराया कि सांसद ने हाल ही में 20,000 स्क्वायर फीट में अपना आलीशान मकान का निर्माण कराया, जो उनकी आय से कई गुना ज्यादा है। इस मकान की वजह से भी सांसद पार्टी की साख को बट्टा लगा रही हैं।
सांसद का व्यवहार बहुत रूखा
दीक्षित ने अपने पत्र में सांसद पर आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को संरक्षण देने के गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सांसद द्वारा हाल ही में आईएएस और सिरौलीगौसपुर के उपजिलाधिकारी अजय द्विवेदी से चर्चित विवाद इसका जीता जागता उदाहरण है। जिसमे सांसद उस व्यक्ति का पक्ष लेती दिखीं जिसने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा था। ऐसे व्यक्ति के लिए सांसद ने अजय द्विवेदी से अभद्रता और हाथापाई की। दीक्षित ने आरोप लगाते हुए कहा कि सांसद का उच्च जाति के अधिकारियों से बहुत रूखा व्यवहार रहा है। बाराबंकी में इससे पहले जिलाधिकारियों में योगेश्वरराम मिश्रा, अजय यादव से विवाद और बाराबंकी में अपर पुलिस अधीक्षक रह चुके कुंवर ज्ञानंजय सिंह को सार्वजनिक तौर पर बेइज्जत करना, आईएएस अजय द्विवेदी से हाल ही में विवाद और मुकदमा लिखे जाने के बाद जिलाधिकारी अखिलेश तिवारी से विवाद इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।
सांसद पर कार्रवाई की मांग
दीक्षित ने भाजपा के शीर्ष नेताओं से सांसद के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि सांसद पार्टी की गरिमा गिरा रही हैं। सांसद खुद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के आदेशों का मज़ाक उड़ा रही हैं। न्यायालय और शासन की मंशा को दरकिनार कर रही है। सांसद की कार्यशैली से सिर्फ भाजपा को नुकसान ही नहीं हो रहा है बल्कि भाजपा की रीति-नीति से अंजान सांसद की कार्यशैली से पार्टी बदनाम भी हो रही है। दीक्षित ने पार्टी नेतृत्व से सांसद पर शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की है।
Published on:
20 Dec 2017 09:17 am
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