4 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नए विवाद में सांसद प्रियंका सिंह रावत, शादीशुदा जोड़े का दोबारा करा दिया विवाह

101 जोड़ों की संख्या पूरी करने के लिए पत्नी के साथ रचाई दी शादी...

3 min read
Google source verification
Controversy over BJP MP Priyanka Rawat samuhik vivah in Barabanki news

Priyanka Singh Rawat

बाराबंकी. 9 दिसम्बर को बाराबंकी की भाजपा सांसद ने 101 सामूहिक शादियां करवाकर सुर्खियां बटोरीं। उत्तर प्रदेश के कई मंत्री और विधायक भी इस भव्य कार्यक्रम के गवाह बने। मगर अब उन सामूहिक शादियों की पोल परत-दर-परत खुलती जा रही है। अब इस कार्यक्रम के संबंध में ही लोग चुटकी लेने लगे हैं।

पहले ही हो चुकी थी शादी

101 जोड़ों में से एक ऐसे जोड़े का कबूलनामा सामने आया जिसकी शादी इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम से काफी पहले ही हो चुकी है। वहीं सांसद प्रियंका सिंह रावत से जब इस बारे में पूछा गया तो बताया कि उन्होंने कार्यक्रम से पहले ही अपने लोगों के द्वारा जांच करवा ली थी। ऐसी कहीं भी कोई बात अब तक सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल ये है कि क्या सांसद को गुमराह किया गया। शादी के लिए ऐसे लोगों का रजिस्ट्रेशन करवाया गया जो सिर्फ शादी का सामान लेने के लिए शामिल हुए थे। सामूहिक विवाह पर इस खुलासे के बाद सवाल ये भी खड़े हो रहै हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के महंती वाली गोरक्षपीठ को भी इस मामले में अंधेरे में रखा गया।

जोड़ों की गिनती बढ़ाने के लिए बुलाया

मामला बाराबंकी जनपद की भाजपा सांसद प्रियंका सिंह रावत से जुड़ा हुआ है। दरअसल 9 दिसंबर को भाजपा सांसद ने 101 जोड़ों की शादियां करवा कर वाहवाही लूटी थी। इस कार्यक्रम की भव्यता बढ़ाने के लिए कई भाजपा सांसद, विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री शामिल हुए थे। मगर इस कार्यक्रम की भव्यता का राज अब खुलने लगा है। 101 जोड़े में से एक जोड़ा ऐसा भी सामने आया जिसकी शादी पहले ही हो चुकी है। वह यहां सिर्फ जोड़ों की गिनती बढ़ाने और शादी का सामान लेने आये थे।

जोड़े की जांच में हुआ खुलासा

थाना जैदपुर इलाके के टिकरा मुर्तजा गांव के रहने वाले सत्यवान जो सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शादी करने के लिए शामिल हुआ था और कार्यक्रम में मिलने वाला शादी का लाखों का सामान भी लेकर गया था। हमें जब इस जोड़े पर शक हुआ तो इसकी जांच शुरू की। जांच में जो तथ्य सामने आए वह चौंकाने वाले थे। जब सत्यवान से पूछा गया तो पहले तो उसने मना किया, लेकिन थोड़ी देर में ही हकीकत खुलकर सामने आ गई। सत्यवान ने आखिरकार कबूल कर लिया कि इस समारोह से पहले ही उसकी शादी हो चुकी है। कार्यक्रम में उसे सिर्फ संख्या को पूरी करने के लिए शामिल कराया गया था। शादी में जो भी सामान मिला वह उसके पास है। उससे ससुराल वालों ने कहा था कि उसे अपनी पत्नी के साथ सिर्फ बैठकर दिखावे के लिए शामिल होना है। शादी तो उनकी हो ही चुकी है। सत्यवान ने बताया कि इस कार्यक्रम में जोड़ों से एक हजार रुपए रजिस्ट्रेशन के नाम पर वसूले गए।

शादी नहीं, ये था राजनैतिक दिखावा

जनपद में अब तक तीन हजार से ज्यादा जोड़ों की सामूहिक शादी करवा चुके भारतीय किसान यूनियन के प्रान्तीय महासचिव मुकेश सिंह ने कहा कि यह शादी का समारोह नहीं बल्कि एक राजनैतिक दिखावा था। जिसमें बड़े-बड़े नेताओं को बुलवाकर राजनैतिक मंच बनाया गया और वाहवाही लूटी गई। कार्यक्रम की भव्यता में सांसद इस तरह डूब गई कि शादी के संस्कार, फेरे इत्यादि नहीं करवाए गए। यह शादी नहीं बल्कि एक सामूहिक मजाक था। मुकेश सिंह ने बताया कि शादी हम भी करवाते हैं, तो उसमें सभी संस्कारों का ध्यान रखा जाता है। तेल पूजन, मातृ पूजन, विदाई, ब्राम्हणो के मंत्रोचार, निकाह में मुस्लिम संस्कार और बारातियों के खानपान आदि का ध्यान रखा जाता है। ताकि किसी बेटी को या जोड़े को या उसके परिवार को यह अहसास भी न हो कि अगर हम अपनी मर्जी से शादी करते तो संस्कारों का ध्यान रखते। मुकेश सिंह ने कहा कि शादी सामाजिक भावनाओं का कार्यक्रम होता है। जन्म-जन्म का रिश्ता माना जाता है। इसलिए इसका मजाक नहीं होना चाहिए।

सांसद ने कहा- ऐसा हो ही नहीं सकता

इन सब बातों को लेकर जब हमने कार्यक्रम की आयोजक और बाराबंकी से भाजपा सांसद प्रियंका सिंह रावत से बात की तो उन्होंने बताया कि ऐसा हो ही नहीं सकता क्योंकि सभी जोड़ों की जांच करवाई गई थी ताकि कोई मीनमेख न निकाल सके। ऐसी बात करना इस कार्यक्रम के साथ बेमानी होगी। कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर समापन तक पूरी सावधानी रखी गयी है। 101 शादियां बिल्कुल सही ढंग से कराई गई है। सांसद ने कार्यक्रम से पहले यह तय किया था कि समारोह के बाद सभी जोड़ों को योगी आदित्यनाथ के गोरक्षपीठ भेजा जाएगा। जहां से वह आशीर्वाद लेकर आएंगे।

क्या सांसद को भी अंधेरे में रखा गया

ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या इस कार्यक्रम के लिए सांसद को भी अंधेरे में रखा गया। क्या सिर्फ जोड़ों की संख्या बढ़ाने के लिए लोगों को अपनी पत्नियों के साथ शामिल कराया गया। क्या सांसद का यह कार्यक्रम सिर्फ ढोंग बनकर रह गया। क्या गोरक्षपीठ और मुख्यमंत्री योगी को भी अंधेरे में रखा गया।