
डेढ़ सौ साल पुरानी यहां की रामलीला का अलग ही अंदाज, आज जलेगा 40 फुट ऊंचा रावण का पुतला
बाराबंकी. बाराबंकी के दशहराबाग की डेढ़ सौ वर्ष पुरानी रामलीला (Ramleela) का एक अलग ही अंदाज है। कनक भवन (Kanak Bhawan) की तर्ज पर यहां स्थित दशहरा मंदिर (Dussehra Mandir) में साल 1897 के प्रमाण भी मिले हैं। यहां की रामलीला में इस बार भी बहराइच और अयोध्या के अलावा बाराबंकी (Barabanki) जिले के करीब 250 से ज्यादा कलाकार मंचन कर रहे हैं। श्री रामलीला सेवा समिति दशहराबाग (Shri Ramleela Seva Samiti Dussehrabagh) की ओर से डेढ़ किलोमीटर की परिधि में प्राचीन रामलीला को भव्य स्वरूप दिया गया है। प्राचीन रामलीला में इस बार भगवान राम और रावण का युद्ध हाइड्रोलिक मंच और नैमिष के तीरों से होगा। जिसके बाद 40 फुट ऊंचे रावण के पुतले का दहन होगा। खास बात है कि रामलीला का रावण और मेघनाद का पुतला पहिए पर तैयार किया जाता है। जो युद्ध के समय चलता है और मेलार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है। इसके साथ ही युद्ध में हाथी, घोड़ा और ऊंट का प्रयोग भी होता है।
क्या कहते हैं कलाकार?
दशहरा (Dussehra 2019) पर रामलीला में दशानन के रोल करने वाले अक्षत सिंह के मुताबिक मेरे ताऊ जी शिव कुमार और बाबा पहले रावण की भूमिका निभाते थे। अब वर्ष 2016 से यह भूमिका मै निभा रहा हूं। वहीं हनुमान का किरदार निभाने वाले कलाकार राजीव पाठ का कहना है कि ऐसी रामलीला का मंचन शायद ही किसी जिले में होता हो। मैं मुख्य किरदार हनुमान जी की भूमिका निभा रहा हूं। इससे पहले ये भूमिका मेरे पिता जी निभाते थे।
बचपन से देख रहे रामलीला
श्री रामलीला सेवा समिति के सदस्य मनोज जायसवाल का कहना है कि प्राचीन रामलीला (Ramleela) के साथ जुड़कर अच्छा लगता है। पूरे दस दिन तक हमलोग एक घर के सदस्य की तरह रामलीला में सहयोग प्रदान करते हैं। मैं बचपन में दशहराबाग (Dussehrabagh Barabanki) की प्राचीन रामलीला देखने आया हूं। देखते ही देखते प्राचीन रामलीला का स्वरूप आज काफी भव्य हो गया है। इसे देखकर सुखद अनुभूति होती है। समिति के महामंत्री शिव कुमार वर्मा ने बताया कि प्राचीन रामलीला में पिछले 28 वर्ष तक मैंने रावण (Ravan) की भूमिका निभाई। अब वर्तमान में पहली बार मेरा पुत्र अमर सिंह रावण की भूमिका निभा रहा है।
50 साल से बना रहे रावण का पुतला
वहीं कारीगर अहमद हुसैन ने बताया कि वह 50 वर्ष से रावण के पुतले को तैयार करते आ रहे हैं। इससे पहले उनके पिता हनीफ यह कार्य करते थे। हुसैन ने बताया कि वह दशहरा (Dussehra 2019) आने से दो माह पहले से ही रावण के पुतलों को तैयार करने में जुट जाते हैं। तय तिथि तक वह डिमांड के अनुसार अच्छा व बड़ा रावण व मेघनाद तैयार करते हैं।
Updated on:
08 Oct 2019 11:55 am
Published on:
08 Oct 2019 11:11 am
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