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दूर-दूर तक मशहूर हैं जैदपुर के पटाखे, यहां बारूद के ढेर पर बनती हैं दिवाली की खुशियां

बाराबंकी का जैदपुर कस्बा पटाखा निर्माण के लिए पूरे जनपद में विख्यात है।

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Jaidpur Barabanki crackers in Diwali UP Hindi News

दूर-दूर तक मशहूर हैं जैदपुर के पटाखे, बारूद के ढेर पर बनती हैं दिवाली की खुशियां

बाराबंकी. पूरे देश में दीवाली की धूम है। हर बार की तरह इसका सबसे बड़ा आकर्षण पटाखे हैं। इन पटाखों का इस्तेमाल करके बच्चे तो खुश होते ही हैं, बूढ़े भी बच्चों की खुशी देखकर आनंदित होते हैं। मगर इतनी खुशियां देने वाला पटाखा कितनी मशक्कत से तैयार होता है। यह कभी किसी ने नहीं सोचा है। पटाखा बनाने में इसके कारीगर काफी खतरा भी उठाते हैं।

मशहूर हैं जैदपुर के पटाखे

बाराबंकी का जैदपुर कस्बा पटाखा निर्माण के लिए पूरे जनपद में विख्यात है। लगभग पूरे जनपद में यहीं से पटाखे तैयार होकर जाते हैं और त्योहार की रौनक बढ़ाकर लोगों में खुशियां फैलाते हैं। मगर यह कम ही लोग जानते हैं कि पटाखों को तैयार करने वालों की जान हथेली पर होती है। जैदपुर में पटाखा बना रहे कारीगर को देखकर पता चलता है कि कैसे यह अपनी जान को हथेली पर रखकर इसका निर्माण करते हैं। बारूद के ढेर पर बैठे इस कारीगर से अगर जरा सी लापरवाही हुई तो वह घर समेत हवा में उड़ जाएगा। एक छोटी सी चिंगारी यहां बहुत बड़ा प्रलय ला सकती है। इस बड़ी दुर्घटना को फायर विभाग ही बचा सकता है, जिसकी सुस्ती यहां साफ दिखाई देती है।

पटाखा कारीगरों के सामने मुश्किलें

इस पटाखा कारीगर की दुश्वारियां यहीं खत्म नहीं हो जाती। पटाखा निर्माण के बाद बाजारों की मंडी का असर इनके किये कराए पर पानी फेर देती है। जब इनसे बात की गई तो पता चला कि नोटबंदी के बाद से बाजारों से त्योहारों की रौनक गायब है। इससे पूर्व हफ्ते भर पहले से ही पटाखा खरीददारों की भीड़ लग जाती थी। मगर अब जब दिवाली सर पर है, इसके बावजूद ग्राहकों का टोटा लगा हुआ है। पटाखा खरीददार बड़ी मुश्किल से दुकानों तक पहुंच रहे हैं। पहले ग्राहक पटाखों का इंतजार करते थे, मगर अब पटाखे ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं। मंजर ने हमे बताया कि उसके पास अपने परिवार के पालन-पोषण का कोई दूसरा जरिया नहीं है। मगर ग्राहकों के आने का अगर ऐसा ही सिलसिला रहा तो पूरा परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएगा। क्योंकि पटाखे की लागत निकलना भी ऐसे हालात में मुश्किल हो जाएगा। इसलिए हम यह कह सकते हैं कि पूरे बाराबंकी में खुशियां फैलाने वाले कारीगर दुश्वारियों के शिकार हैं, इनके सामने अपनी रोजी-रोटी चलाने की बड़ी मुश्किल है।