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बाराबंकी के कुंवर दिव्यांश की आज पीठ थपथपाएंगे पीएम मोदी, तेरह साल की उम्र में सांड से किया था मुकाबला, ऐसे बचाई थी बहन की जान

Kunwar Divyansh Barabanki: बाराबंकी के कुंवर दिव्यांश सिंह ने महज तेरह साल की उम्र में अपनी बहादुरी से सांड के हमले से अपनी बहन समेत आठ लोगों को बचाकर कीर्तिमान बनाया था।

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बाराबंकी के कुंवर दिव्यांश की आज पीठ थपथपाएंगे पीएम मोदी, तेरह साल की उम्र में सांड से किया था मुकाबला, बचाई बहन की जान

बाराबंकी के कुंवर दिव्यांश की आज पीठ थपथपाएंगे पीएम मोदी, तेरह साल की उम्र में सांड से किया था मुकाबला, बचाई बहन की जान

बाराबंकी. Kunwar Divyansh Barabanki: जनपद बाराबंकी के कुंवर दिव्यांश सिंह ने महज तेरह साल की उम्र में अपनी बहादुरी से सांड के हमले से अपनी बहन समेत आठ लोगों को बचाकर कीर्तिमान बनाया था। इसके लिए इन्हें राष्ट्रीय और राज्य स्तर सहित करीब दो दर्जन पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। अब इनका चयन प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार अवार्ड-2021 के लिए किया गया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दिव्यांश को शाबासी देंगे।

राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चयनित

कुंवर दिव्यांश सिंह नवाबगंज तहसील के मखदूमपुर के रहने वाले हैं। दिव्यांश सिंह को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। दिव्यांश से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शाबासी देंगे। दिव्यांश को यह पुरस्कार तीन साल पहले अपनी बहन की सांड़ के हमले से भिड़कर जान बचाने के लिए दिया जा रहा है। दिव्यांश सिंह 30 जनवरी 2018 को अपनी पांच वर्षीय बहन समृद्धि समेत आठ दूसरे स्कूली बच्चों के साथ लौट रहा था। तभी शहर के रोडवेज बस अड्डे के पास एक सांड़ ने उसकी बहन पर हमला कर दिया। बहन की जान का खतरा देख दिव्यांश ने बहादुरी और अदम्य साहस दिखाते हुए अपने स्कूली बैग से ही हमलावर सांड़ से भिड़ गया और आखिर में सांड़ को भगाकर बहन की जान बचा ली।

पूरे प्रदेश में बहादुरी के चर्चे

इस दौरान दिव्यांश के दाहिने हाथ में चार जगह फ्रैक्चर हो गया। कुंवर की इस बहादुरी के चर्चे पूरे प्रदेश में हुए थे। तीन साल बाद उसे राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय से दिव्यांश के घर पहुंचे पत्र से इसकी जानकारी मिली। यही नहीं आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कुंवर दिव्यांश से सीधे बात कर बहादुरी के लिए उसे शाबासी भी देंगे। इससे पहले भी दिव्यांश को राष्ट्रपति रामनाथ कोविद, पूर्व राज्यपाल रामनाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सम्मानित कर चुके हैं। दिव्यांश के पिता डॉ. डीबी सिंह लखनऊ स्थित डॉ. शकुंतला मिश्र दिव्यांग विश्वविद्यालय में छात्र कल्याण विभाग के एसोसिएट संकायाध्यक्ष और मां डॉ. विनीता सिंह पैसार स्थित श्री गंगा मेमोरियल पीजी कॉलेज में उपाचार्य हैं।

मजबूती से करें मुश्किल का मुकाबला

अवार्ड के लिए चयनित कुंवर दिव्यांश सिंह का कहना है कि किसी भी मुश्किल से डरने के बजाय उसका मजबूती से मुकाबला करना चाहिए। उन्होंने बताया कि 31 जनवरी 2018 को वह जयपुरिया स्कूल से पढ़ाई कर घर लौट रहे थे। स्कूल बस से उतरने के बाद वह अपनी बहन और सात बच्चों के साथ जा रहे थे। रास्ते में सांड बच्चों की ओर बढ़ा तो उन्होंने अपने स्कूल बैग से सांड पर ताबड़तोड़ कई वार किए। इससे सांड उसे धक्का देते हुए भाग गया, जिससे वह गिर गए। दिव्यांश की बहादुरी से उनकी बहन समेत आठ बच्चों की जान तो बच गई, लेकिन गिरने से दिव्यांश के दाहिने हाथ में फ्रैक्चर हो गया, जोकि करीब तीन माह बाद ठीक हुआ।

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