
Hadoti Mandi: बारां लहसुन उत्पादन की दृष्टि से हाडौती ही नहीं प्रदेश का एक महत्वपूर्ण जिला है। पिछले वर्षों में जिला कृषि खाद्यान्न एवं तिलहन उत्पादन तक ही सीमित था, लेकिन अब कृषि फसल विविधता की ओर कृषकों का रूझान बड़ा है। जिससे खेती के स्वरूप में धीरे-धीरे परिवर्तन देखने का मिल रहा है। पहले जहां खाद्यान्न, तिलहन फसलों का ही उत्पादन किया जाता था। आज वहां व्यापारिक मसाला फसलों का उत्पादन भी हो रहा है। इसका प्रमुख कारण जिले की जलवायु मसाला फसल उत्पादन की दृष्टि से अनुकूल है। जो इसके उत्पादन एवं क्षेत्रफल में निरन्तर वृद्धि कर रही है। लहसुन की फसल आर्थिक दृष्टि से कृषकों की स्थिति मजबुत करने में रीड़ की हड्डी साबित हुआ है।
बारां जिला लहसुन फसल में क्षेत्रफल, उत्पादन एवं उत्पादकता की दृष्टि से राजस्थान में अग्रणी स्थान रखता है। विगत वर्षों में राज्य में औसत 89805 हैक्टयर में बुवाई होकर औसत उत्पादकता 5916 किलोग्राम रही है। जिसमें से बारां जिले का औसत क्षेत्रफल 30714 हैक्टयर होकर प्रति हैक्टेयर 6133 किलोग्राम उत्पादकता रही है।
जिले में चिकनी दोमट से लेकर कपास की काली मिट्टी पाई जाती है। जो कि जलधारण करने की प्रबल क्षमता रखती है। इसी के चलते जिले में उत्पादन होने वाले लहसुन की गुणवत्ता तथा स्वाद पूरे देश में पसन्द किया जाता है।
क्षेत्रफल, उत्पादन एवं उत्पादकता में राज्य एवं हाडौती संभाग में अग्रणी स्थान के चलते जिले में छीपाबड़ोद एवं बारां कृषि उपज मण्डी को विशेष लहसुन मण्डी घोषित किया हुआ है। जिसमें न केवल जिले के बल्कि मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जिलों से भी लहसुन की आवक होकर विपणन का कार्य किया जाता है।
कृषि उपज मंडी स्थित लहसुन मंडी में इस वर्ष मार्च 2024 से 20 सितबर 2024 तक करीब 4 लाख 49 हजार 996 क्विंटल लहसुन की आवक हुई है। जहां पर करीब 576 करोड़ का कारोबार हुआ है। जिससे कृषि उपज मंडी को भी 9.22 करोड़ के मंडी शुल्क की आय हुई है।
बारां लहसुन मंडी से देश के असम, बिहार, बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडू,केरल, उड़िसा तथा छत्तीसगढ़ समेत विदेशों तक बिक्री के लिए भेजा जाता है। यहां के लहसुन की इन क्षेत्रों के बाजारो में अच्छी डिमाण्ड रहती है।
वर्तमान में देश में अफगानिस्तान तथा इरान से लहसुन का आयात किया जाता है। वहीं, चाइना से चोरीछीपे लहसुन की देश के बाजार में आवक होने से भावो में फर्क पड़ता है। हालांकि चाइना का लहसुन स्वाद व गुणवत्ता के स्तर से काफी हल्का होता है।
वर्ष 2024 में मार्च माह से नए लहसुन की मंडी में आवक शुरु हुई थी। लहसुन व्यापार संघ अध्यक्ष जगदीश बंसल ने बताया कि शुरुआत में भाव कम रहे। मार्च में जहां 4 से 12 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक के ओसत भाव से ही लहसुन की बिकवाली हुई। जो कि अप्रेल, मई तथा जून तक 5 से 16-17 हजार रुपए प्रति क्विंटल के भावो पर स्थर हो गई। जुलाई माह में लहसुन के भाव उपर चढऩे लगे जो कि 25 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक के पार हो गए। वही अगस्त माह में उच्चतम 40 हजार प्रति क्विंटल तक के आंकड़े को छू लिया। सितबर माह में ओसत भावो में वापस 4 से 5 हजार रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट आई है।
वर्ष क्षेत्रफल (हैक्टे.) उत्पादन (एमटी)
2016-17 40670 283999
2017-18 41779 237018
2018-19 23380 161579
2019-20 23975 173095
2020-21 32268 210354
2021-22 29805 172855
2022-23 22631 116131
2023-24 31211 156055
Updated on:
25 Oct 2024 09:04 am
Published on:
23 Sept 2024 11:51 am
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