
बारां। जिले में रविवार रात से शुरू हुआ बारिश का दौर सोमवार शाम तक जारी रहा। सुबह छह बजे से करीब आधे घंटे तक तेज बारिश हुई। इसके बाद कई क्षेत्रों में चली तेज हवा से धनिये, सरसों व गेहूं की फसल आड़ी पड़ गई। इनमें धनिया की फसल में व्यापक खराबे के आसार हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी हुई बरसात से फसलों में फायदा ही होगा। धनिये की फसल में नुकसान हो सकता है।
जिले में इस वर्ष करीब 11800 हैक्टेयर में धनिये की बुवाई हुई है। जबकि अगेती बुवाई की सरसों अभी पकाव की स्थिति में है। कई क्षेत्रों में भी सरसों तेज हवा चलने व छिटपुट ओलावृष्टि से आड़ी पड़ गई। सरसों में भी खराबे के आसार बन गए। जिले में 1 लाख 53 हजार हैक्टेयर में सरसों की बुवाई हुई है। इसमें करीब 35 हजार हैक्टेयर में अगेती बुवाई की है, जो अब पकाव के बाद कटाई की अवस्था में आ गई है। मौसम खुलने व तेज धूप निकलने पर पकी हुई सरसों की फलियां तड़कने लगेंगी और किसानों को कटाई से पूर्व ही दाने खेत में बिखरे दिखाई देंगे।
जिससे सरसों का उत्पादन प्रभावित होगा। जिले में इस वर्ष सरसों के बम्पर उत्पादन की आस जताई जा रही थी। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौर में हुई बारिश से गेहूं का रंग जम सकता है। जिले में अभी गेहूं की फसल में बालियां बनने का दौर चल रहा है। बारिश से सिंचाई की व्यवस्था किसानों को नहीं करनी होगी। वहीं बारिश से बालियों की बढ़वार होगी।
सर्वाधिक 20 मिमी बारिश किशनगंज उपखंड पर दर्ज की गई। इसके अलावा मांगरोल में 13, बारां में 9, अंता में 7 व शाहाबाद में 2 मिमी बारिश रेकॉर्ड की गई। अटरू, छबड़ा व छीपाबड़ौद उपखंड मुख्यालयों पर बारिश दर्ज नहीं हुई।
जलवायु परिवर्तन का दिख रहा असर
जलवायु परिवर्तन के कारण से कभी अत्याधिक गर्मी, कभी कम बारिश, कभी अतिवृष्टि एवं बैमौसम ऋतु परिवर्तन आम समस्या हो गई है। यह सब माननीय कारणों जैसे घटते जंगल, बढ़ते प्रदूषण तथा अव्यआधुनिक हथियारों का उपयोग से होता है। वर्तमान में राजस्थान में मावठ का दौर चल रहा है। वैसे तो मावठ की बारिश हर वर्ष होती है, परन्तु इस वर्ष राजस्थान के 20 से भी अधिक जिलों में इसका प्रमाण देखा गया है। कई स्थानों पर भारी मात्रा में ओलावृष्टि भी हुई है।
बारां जिले की बारिश का मिला जुला प्रभाव होगा। जहां गेहूं, चना, लहसुन में फायदेमंद है, वहीं अगेती सरसों एवं धनिया में नुकसानदायक होगी। जिले के किसान फसल चक्र में बदलाव की सलाह को अनदेखा कर रहे हैं। फसल चक्र में बदलाव से काफी हद तक इस पर काबू पाया जा सकता है। जब तक किसान इस पर अमल करेंगे तो जलवायु परिवर्तन के इस दौर से उभरा जा सकता है।
डॉ. इन्द्रनारायण गुप्ता, पूर्व मुख्य वैज्ञानिक केवीके अन्ता
जिले में कुछ गांवों में छोड़कर ओलावृष्टि के कोई समाचार नहीं है। धनिये की फसल के अलावा रवी की अन्य फसलों में फायदे के आसार हैं, बशर्ते मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार मंगलवार से मौसम साफ रहे। जिले के सभी कृषि पर्यवेक्षकों को बारिश से नुकसान के आकलन के सर्वे के निर्देश दिए हैं।
अतीश कुमार शर्मा, उपनिदेशक कृषि विस्तार, बारां
Published on:
31 Jan 2023 02:25 pm
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