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राजस्थान में दो धड़ों में बंटी कांग्रेस होगी एक, सचिन पायलट और होंगे मजबूत

तीन साल से अधिक समय से बिना किसी पद के पार्टी में काम कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के साथ गुजरात का प्रभारी बनाया गया है।

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तीन साल से अधिक समय से बिना किसी पद के पार्टी में काम कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के साथ गुजरात का प्रभारी बनाया गया है। इससे प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अंदरखाने चल रही बहस थम गई है। कांग्रेसी अब प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट के साथ आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एकजुट हो सकेंगे। इससे प्रदेश में कांग्रेस और मजबूत होगी। गहलोत एक साल गुजरात में व्यस्त रहेंगे।

इधर राजस्थान में भी अगले साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। गहलोत के राज्य में लगातार दौरे करने से कांग्रेस पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं में गत तीन साल से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। केन्द्रीय नेतृत्व ने उन्हें एआईसीसी में पद देने के साथ गुजरात की जिम्मेदारी देकर साफ कर दिया है कि अब राजस्थान में प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट के नेतृत्व में ही कांग्रेस विधानसभा चुनाव में उतरेगी। गहलोत ने भी नई जिम्मेदारी मिलने के बाद कहा कि प्रदेश में युवा नेता सचिन पायलट और रामेश्वर डूडी अच्छा काम कर रहे हैं।

कांग्रेसियों में नजर आ रही थी गुटबाजी

सूत्रों के मुताबिक केन्द्रीय नेतृत्व ने दिल्ली में गहलोत को बड़ी जिम्मेदारी देकर उनका कद बढ़ाया है। इससे माना जा रहा है कि उनकी सक्रियता अब केन्द्रीय राजनीति में बढ़ेगी। हाल ही धौलपुर में हुए उपचुनाव में हार को लेकर परस्पर बयानबाजी के बाद प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी बढऩे की आशंका जताई जा रही थी। केन्द्रीय नेतृत्व इन पर विराम लगाने की जुगत में लगा था।

कामत का इस्तीफा

कांग्रेस नेता और एआईसीसी के महासचिव गुरुदास कामत ने पार्टी में अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। कामत ने एक बयान में राजनीति से सेवानिवृत्ति की ओर इशारा करते हुए कहा कि मैं पिछले सप्ताह बुधवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिला था और सभी जिम्मेदारियों से मुक्त होने के बारे में चर्चा की थी।

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