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फर्जीवाड़े के मुकदमे पर भाजपा पर भड़के पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया, कहा: मेरे खिलाफ हो रही साजिश

राजस्थान की पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार में मंत्री रहे प्रमोद जैन भाया पर फर्जीवाड़ा के मामले में बीते दिनों एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसको लेकर उन्होंने कहा की मेरे कार्यालय से किसी प्रकार का कोई सिफारिश पत्र जारी नहीं किया गया है।
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बारां

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Rakesh Mishra

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Updated: 27 Jan 2024, 7:51 PM IST

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राजस्थान की पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार में मंत्री रहे प्रमोद जैन भाया पर फर्जीवाड़ा के मामले में बीते दिनों एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसको लेकर उन्होंने कहा की मेरे कार्यालय से किसी प्रकार का कोई सिफारिश पत्र जारी नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेताओं ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर मुकदमे में मुझे झूठा फंसाकर बदनाम किया जा रहा है। दरअसल अंता नगर पालिका में चुनावी आचार संहिता के दौरान बैक डेट में निविदा जारी करने के मामले में भाया और अंता नगर पालिका चेयरमैन मुस्तुफा खान समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।


पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता रामेश्वर खण्डेलवाल, बारां के पूर्व सभा पति कमल राठौर व अंता निवासी मोहित कालरा ने षडयंत्रपूर्वक मेरे लेटर हेड पर मेरी ओर से निविदा संख्या 30/2023-24 में वर्क आर्डर जारी करने के लिए अधिषाषी अधिकारी, नगर पालिका, अन्ता को संबोधित अनुषंषा पत्र कूटरचित कर उपर्युक्त मुकदमें में थाना अन्ता पुलिस को पेश किया है। भाया ने कहा, मेरी ओर से ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया गया। उन्होंने कहा की कमल राठौर इस तरह की कूट रचना में मास्टर माइंड है। राठौड़ ने पूर्व में माननीय न्यायाधीश के ही फर्जी हस्ताक्षर, मुहर व पत्र कूट रचित कर अपना सीज बैंक खाता चालू करवा लिया था। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के पूर्व विधायक पानाचंद मेघवाल ने अंता थाना पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाया अंता नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर खंडेलवाल, बारां के पूर्व सभापति कमल राठौर व मोहित कालरा के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने का मामला दर्ज कराने गए थे, लेकिन सीआई ने 4 घंटे थाने में बैठाकर टालमटोल की गई। इसके बाद जब कांग्रेस नेताओं ने थाने का घेराव करने की चेतावनी दी गई, तब जाकर सिर्फ परिवाद दर्ज किया गया है।

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गौरतलब के भाया के खिलाफ दर्ज एफआईआर में कहा था कि पूर्व मंत्री प्रमोद जैन व चेयरमैन मुस्तफा खान ने अपने प्रभाव का प्रयोग कर नगरपालिका के अधिकारी, कर्मचारियों पर अनुचित दबाव व प्रभाव से आचार संहिता के बाद भी टैंडर खुलवाए। इसके बाद ऑनलाइन ओपन हुए टेंडर की शीट को नष्ट कर वैसी ही टेक्निकल व वित्तीय बीड शीट 7 अक्टूबर की तारीख में आचार संहिता के पहले की दशति हुए कूटरचित फर्जी तैयार की गई। 9 अक्टूबर की असली शीट को गायब कर उसकी जगह फर्जी शीट को फाइल में लगाया। पुरानी तारीख में सरकारी नोटशीट तैयार की और 7 तारीख में ही उक्त निविदाओं के वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिए।

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