
Baran News : हरनावदाशाहजी. कस्बे समेत ग्राम पंचायत के गांवों में पेयजल संकट ने दस्तक दे दी है। वहीं जल जीवन मिशन के तहत कस्बे में चार करोड रुपए की लागत से तैयार हो चुके पांच कुओं एवं टंकी का दो साल बाद भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कस्बे में बरसों से दो समय की जलापूर्ति से लोगों का काम चल रहा था। इस साल बरसात कम होने से नदी नाले समय से पहले सूख गए। कुओं, बावडियों में जलस्तर गहरा जाने से रीतने के हालात विकट हो गए। ऐसे में कस्बे में इन दिनों ज्यादातर लोगों के घरों में बनी कुइयों में भी पानी की कमी होने लगी है। इधर कस्बे को बारहों महीने जलापूर्ति उपलब्ध कराने वाले चार पुराने सरकारी कुओं में भी इस बार जलस्तर गहरा जाने से पानी रीतने की समस्या है। इसके चलते कस्बे में डेढ महीने से दो की बजाय जलापूर्ति एक समय होने लगी है। उसमें भी समय घटा देने से कई मोहल्लों में लोगों को पीने तक का पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। सर्दी का मौसम पूरा होने से पहले ही लोगों को पानी के लिए भटकने की नौबत आने लगी है।
पंचवटी क्षेत्र में पांच नए कुएं एवं नई कॉलोनी में उच्च जलाशय का निर्माण दो वर्ष पहले शुरु हुआ था। कुएं व टंकी का निर्माण भी हो चुका है। लेकिन बाकी काम अधूरा पड़ा होने से इनका लाभ नहीं मिल रहा। यहां तक कि योजना के तहत कस्बे समेत सालरखो, रतनपुरिया में नए नल कनेक्शन चालू करने थे। यह न तो बराबर लाइनें बिछाई गई और न ही कनेक्शन चालू किए। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पुराने कुओं में पानी कम हो जाने से टंकियां नहीं भर पा रही है। कनिष्ठ अभियंता अकील ने भी पहले तो योजना के बारे में उच्चाधिकारियों से बात करने की बात कही। फिर किसी काम में लगे होने की बात कहकर थोडी देर में जानकारी देने की बात कही।
लोगों का कहना है कि नए कुओं का पानी लिफ्ट करके जलापूर्ति से जोड़ना चाहिए। कई मोहल्लों में नल कनेक्शन देने के लिए खुले छोड़ रखे पाइप लाइनों के जाल राहगीरों के पैरों में उलझते हैं। ग्रामीणों ने जिला कलक्टर से पेयजल समस्या दूर करने की मांग करते हुए योजना का लाभ दिलाने की मांग की है। इधर, लोग सार्वजनिक कुओं में मोटरें लगाकर घरों तक पानी पंहुचाने की व्यवस्था कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर लोग नए बोरवेल खुदवाए जा रहे हैं। क्षेत्र के पहाडी इलाकों के गांवों में भी पानी को लेकर समस्या होने लगी है। ऐसे में मवेशियों के सामने भी गंभीर संकट की आशंका से पशुपालकों में चिंता होने लगी है।
Published on:
27 Feb 2024 03:12 pm
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