
File Photo: Patrika
Agriculture News: आदिवासी सहरिया बहुल पिछड़े क्षेत्र में अधिकांश लघु सीमांत कृषक है और सिंचाई के पर्याप्त संसाधनों के अभाव में ज्यादातर लोग बारिश पर निर्भर खेती करते हैं। ऐसे में किसानों को अपनी उपज का पर्याप्त मुनाफा नहीं मिल पा रहा है, ऊपर से समय-समय पर आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के कारण काफी नुकसान उठना पड़ता है जिससे पारंपरिक खेती के प्रति किसानों का रुझान कम हो रहा है। इस बीच कई किसान अब प्राकृतिक खेती के साथ-साथ आधुनिक खेती की ओर झुक रहे हैं जिसके तहत स्मार्ट फार्मिंग का नया तरीका लोगों ने अपनाया है।
इसमें कृषि विभाग की मदद से प्रदर्शन और अन्य प्रकार की सरकारी सहायता के अनुसार खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही शाहाबाद क्षेत्र में स्मार्ट फार्मिंग के लिए कृषि विभाग द्वारा पहल करते हुए सोशल मीडिया पर ग्रुप बनाकर लोगों की शंकाओं का समाधान किया जाता है।
साथ ही नवीन तकनीकी और नवाचारों के साथ योजनाओं की जानकारी भी सोशल मीडिया के माध्यम से मिलती है, इससे किसानों को काफी राहत मिली है और किसान खेती के नवाचार कर रहे है। क्षेत्र में अधिकांश किसान लघु सीमांत कृषक है। ऐसे में हर कोई नवाचार नहीं अपना रहा परंतु उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किसान अपना उचित प्रदर्शन दे रहे है।
कर्नाटक मूल के किसान बलवंत सिंह राजस्थान के शाहाबाद उपखंड में रहकर बागवानी और स्मार्ट फार्मिंग का सफल मॉडल तैयार कर रहे हैं। उन्होंने अपने खेत में करीब 200 आम और 250 नींबू के पौधे लगाकर नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिससे उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है।
सहायक कृषि अधिकारी नीरज कुमार शर्मा ने बताया कि किसानों को पारंपरिक अनाज और दलहन फसलों के साथ-साथ सीमित क्षेत्र में सब्जी और बागवानी अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि आय के नए स्रोत विकसित हो सकें। इसी तरह किसान ब्रजेश चंदेल पपीते की खेती कर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में बागवानी आधारित खेती का चलन तेजी से बढ़ रहा है।
उपखंड शाहबाद में खेती करने योग्य भूमि करीब 45 से 50 हेक्टेयर है जिसमें रबी सीजन में गेहूं, सरसों, चना आदि फसलें करते हैं जबकि पानी की अधिकता होती है तो गेहूं का रकबा अधिक बढ़ जाता है। वहीं खरीफ में मक्का, सोयाबीन, धान, उड़द आदि फसलें होती है।
Updated on:
16 May 2026 08:19 am
Published on:
16 May 2026 08:19 am
