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चार प्रकार के माण्डणे
कौशल्या देवी का कहना है कि माण्डणे और उनसे सम्बन्धित लोक गीत, इनकी अन्र्तकथाएं, घरों में बनाने का स्थान, ऋतु, पर्व व और तीज-त्योहार के लिए विशेष महत्व होता है। माण्डने चार प्रकार के होते हैं। इनमें वास्तु आधारित, तिथि आधारित, पर्व आधारित और स्थान आधारित। बकौल कौशल्या देवी वे लगभग 600 प्रकार के माण्डणे उकेरने के साथ इनसी जुड़ी लोक मान्यताएं व अधिकांश गीत उन्हें कंठस्थ हैं।
कई शहरों में कार्यशालाएं
माण्डणा कला को प्रदर्शित करने के लिए इंटैक व स्पिक मैके की ओर से कौशल्या देवी को कई शहरों में आयोजित कार्यशालाओं में आमन्त्रित किया जा चुका है। ख्यातनाम शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खान, उस्ताद नईमुद्दीन, फहीमुद्दीन, डागर व कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज, फिल्म निर्देशक पंकज निहालनी, फिरोज खान, फारूख शेख, शबाना आजमी व मोहन वीण के आविष्कारक पंडित विश्वमोहन भट्ट समेत कई हस्तियां इन कार्यशालाओं में सहभागी रहे और इन सभी ने इस लोक कला को सराहा।